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पहली ही फिल्म में यौन शोषण का शिकार हो गईं थी रेखा, एक शख्स ने बदली जिंदगी

Sat, 07 Oct 2017 08:20 AM IST
amarujala.com- Presented by: आनंद
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22 जनवरी 1980 का दिन था। मौका था ऋषि कपूर और नीतू सिंह की शादी का। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के बड़े से बड़े नाम वहाँ मौजूद थे। 
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अमिताभ बच्चन अपनी पत्नी जया और माता-पिता के साथ वहाँ पहुंचे हुए थे और एक कोने में खड़े होकर मनमोहन देसाई से बात कर रहे थे। जया अपनी सास तेजी बच्चन के साथ बैठी हुई थीं, तभी अचानक रेखा ने एंट्री ली। उन्होंने खूबसूरत सफेद साड़ी पहन रखी थी और उनके माथे पर एक लाल बिंदी लगी हुई थी। लेकिन जो चीज सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच रही थी वो था उनकी माँग के बीच लगा सिंदूर। 

उनको देखते ही फोटोग्राफरों के कैमरे नीतू और ऋषि को छोड़ कर उनकी तरफ मुड़ गए थे। थोड़ी देर बाद रेखा पार्टी से चली गईं थीं, लेकिन वो अपने पीछे कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गईं थीं जो लोगों के जहन में महीनों तक रहे।
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किसके नाम था रेखा की मांग में सिंदूर ?

बाद में एक पत्रिका को दिए गए इंटरव्यू में रेखा ने स्पष्टीकरण दिया कि उस दिन वो सीधे एक शूट से पार्टी में चली आई थीं और जो मंगलसूत्र और सिंदूर वो लगाए हुए थीं, वो उस फिल्म में उनके मेक अप का हिस्सा था। ये थीं असली रेखा जिन्हें विवादों में खेलना पसंद था और उन्हें इस बात की रत्ती भर भी फिक्र नहीं थी कि लोग क्या कहेंगे। 

रेखा की जीवनी, रेखा- द अनटोल्ड स्टोरी लिखने वाले यासेर उस्मान बताते हैं कि रेखा के फिल्मी सफर की शुरुआत हुई थी 14 साल की कच्ची उम्र में जब नैरोबी में रहने वाले प्रोड्यूसर कुलजीत पाल ने उन्हें पहली बार जैमिनी स्टूडियो में देखा था। वो तमिल हीरोइन वाणीश्री को साइन करने गए थे। 

उन्होंने उनके मेक अप रूम में एक गोल मटोल, साँवली लड़की को बैठे हुए देखा। वो खाना खा रही थी। उसकी प्लेट पूरी तरह से भरी हुई थी। किसी ने कुलजीत से फुसफुसा कर कहा कि ये अभिनेत्री पुष्पवल्ली की बेटी है। कुलजीत को उस लड़की में कुछ ऐसा खास दिखाई दिया कि वो उसी शाम पुष्पवल्ली के घर पहुंच गए। 

उन्होंने रेखा से पूछा क्या तुम 'हिंदी बोल सकती हो?' रेखा ने छूटते ही जवाब दिया, 'नहीं।' तभी उनकी माँ ने कहा, "मेरी बेटी की याददाश्त बहुत जबरदस्त है। आप कुछ भी एक कागज पर लिख दें। ये उसे तुरंत याद कर आपके सामने पढ़ देगी।"
कुलजीत ने एक डायलॉग हिंदी में लिखा। रेखा ने उसे रोमन में उतारा और इससे पहले कि कुलजीत अपनी चाय का प्याला खत्म कर पाते, रेखा ने वो डायलॉग सुनाना शुरू कर दिया, "सतीश, अब तो वो दिन आ गया है जब तुम्हारे और मेरे बीच में एक फूलों का हार भी नहीं होना चाहिए।"

कुलजीत ने उसी समय रेखा को अपनी फिल्म के लिए साइन किया। इस तरह उस समय भानुरेखा के नाम से जाने वाली रेखा का फिल्मी सफर अनजाना सफर नाम की फिल्म से शुरू हुआ। 

जब पहली ही फिल्म में यौन शोषण की शिकार हुईं रेखा !

अपनी पहली ही फिल्म में रेखा को एक तरह के यौन शोषण का शिकार होना पड़ा जब निर्देशक राजा नवाथे ने उन पर पांच मिनट लंबा चुंबन का दृश्य फिल्माया।

यासेर बताते हैं, "पहले ही शिड्यूल में कुलजीत, राजा और फिल्म के हीरो विश्वजीत ने योजना बनाई कि फिल्म में एक किसिंग सीन होगा। जैसे ही निर्देशक राजा ने एक्शन कहा, विश्वजीत रेखा को अपनी बाहों में भर कर चूमने लगे। ये सीन पांच मिनट तक चलता रहा। कैमरा रोल करता रहा और न तो निर्देशक ने कट कहा और न ही विश्वजीत रुके। इस बीच यूनिट के लोग जो ये शूटिंग देख रहे थे सीटियाँ बजाते रहे।"

रेखा इस शोषण और अपमान को कभी नहीं भुला पाईं। बाद मे जब मशहूर पत्रिका लाइफ ने भारतीय फिल्मों में चुंबन पर एक स्टोरी की तो उसने विश्वजीत और रेखा पर फिल्माए गए उस चुंबन की तस्वीर को भी छापा। ये फिल्म रेखा के फिल्मों में आने के दस वर्ष बाद रिलीज हुई और बुरी तरह से फ्लाप हुई। 
 

कौन था रेखा का पहला प्यार 

रेखा की पहली हिट फिल्म थी सावन भादो। धीरे धीरे वो बालीवुड में लोकप्रिय होती चली गईं। एक समय ऐसा भी आया कि उनके पास 25 फिल्में थीं। उसी दौरान उनकी मुलाकात विनोद मेहरा से हुई। वो उन्हें पसंद करने लगीं। उन्होंने उनसे शादी भी कर ली लेकिन विनोद मेहरा की माँ ने उन्हें स्वीकार करने से इंकार कर दिया।

यासेर उस्मान बताते हैं, "मैं रेखा के जितने भी करीबी लोगों से मिला, सबने कहा कि विनोद मेहरा उन्हें दिल से चाहते थे। रेखा उन्हें विन विन कह कर पुकारती थीं। लेकिन वो अपनी माँ को रेखा से शादी के लिए नहीं मना पाए। जब वो कोलकाता में शादी कर रेखा को सीधे एयरपोर्ट से अपने घर ले गए और रेखा ने विनोद मेहरा की मां कमला मेहरा के पांव छूने चाहे तो उन्होंने उन्हें धक्का दे दिया।"

"उन्होंने रेखा को अपने घर में नहीं घुसने दिया। एक समय तो वो इतनी नाराज हो गईं कि वो रेखा को चप्पल से मारने पर उतारू थीं। विनोद मेहरा ने उनसे कहा कि वो कछ दिनों तक अपने घर पर रहे। तब तक वो अपनी मां को मनाने की कोशिश करेंगे। लेकिन विनोद मेहरा अपनी मां को कभी नहीं मना पाए और ये रिश्ता वक्त के साथ खत्म हो गया।"
 

जब अमिताभ से शुरू हुआ रेखा के प्यार का सिलसिला 

रेखा की शख्सियत में आमूल बदलाव आया अमिताभ बच्चन से मिलने के बाद। उनकी बिंदास हरकतों, उन्मुक्त व्यवहार और बात बात पर खिलखिला देने की अदा की जगह एक खास किस्म के गांभीर्य ने ले ली।

यासेर बताते हैं, "इन दोनों की पहली बड़ी फिल्म थी दो अंजाने। तब तक अमिताभ की दीवार आ चुकी थी। शोले भी आ चुकी थी। वो फिल्मी दुनिया के उभरते हुए सितारे थे। रेखा उन्हें देखते ही उन पर फिदा हो गईं थीं। उन्होंने सिमी गरेवाल के कार्यक्रम रेनडावू में दिए गए इंटरव्यू में स्वीकार किया है कि अमिताभ बच्चन के सामने खड़े होना उनके लिए आसान नहीं था। वो वक्त पर सेट पर आया करते थे जबकि रेखा अपनी लेटलतीफी के लिए मशहूर थीं।"

"इसे अमिताभ बच्चन का असर कहा जाए या और कुछ, लेकिन रेखा दो अनजाने की शूटिंग के लिए सुबह छह बजे सेट पर हाजिर हो जाती थीं। दो अनजाने की यूनिट के लोग बताते हैं कि वो रेखा में एक खास किस्म का परिवर्तन साफ देख पा रहे थे। एक मोटी, कमर मटकाने वाली और अपने जिस्म की नुमाइश से परहेज न करने वाली रेखा अब एक गंभीर और परिपक्व अभिनेत्री बन चुकी थीं और बड़े फिल्म निर्माता उन्हें साइन करने लगे थे।"

अचानक रेखा के अभिनय का रेंज बढ़ गया था। वो अब घर, खूबसूरत और इजाजत जैसी फिल्में करने लगी थीं। मशहूर फिल्म निर्देशक गुलजार कहते हैं, "वह हर किरदार को एक लिबास की तरह पहन लेती थीं। एक तरफ आप घर देखिए, दूसरी तरफ खूबसूरत।। दोनों बिल्कुल अलग अलग फिल्में हैं। खूबसूरत देख कर लगता है जैसे वो किसी लड़के का रोल निभा रही हों।"

खूबसूरत के लिए रेखा को न सिर्फ राष्ट्रीय पुरस्कार मिला बल्कि फिल्म फेयर ने भी उन्हें 1981 की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना। घर फिल्म में गुलजार ने रेखा और चार स्टंटमैनों को हिदायत दी थी कि बलात्कार के दृश्य को वास्तविक दिखाने के लिए वो जहां चाहें, वहां इंप्रोवाइज कर सकते हैं। कहा जाता है कि रेखा ने उस दृश्य को इतनी शिद्दत से निभाया कि बाद में गुलजार ने उसे डब करने की जरूरत ही नहीं समझी। 

लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब अमिताभ बच्चन रेखा से मिलने तक से कतराने लगे। एक जमाने में अमिताभ बच्चन के काफी करीबी रहे अमर सिंह बताते हैं, "एक बार शबाना आजमी ने मुझे, अमिताभ और जया को अपने जन्मदिन पर बुलाया। हम तीनों लोग एक ही कार में बैठ कर उनके घर पहुंचे। अमिताभ ने अपने ड्राइवर से कहा कि हम लोग यहां देर तक रुकेंगे, इसलिए तुम खाना खा कर वापस आ जाओ।"

जैसे ही हम कमरे में घुसे, हमने वहाँ रेखा को खड़े किसी से बाते करते हुए देखा। अमिताभ उन्हें देखते ही तेजी से पलट कर बाहर आए, लेकिन तब तक ड्राइवर खाना खाने जा चुका था। उन्होंने एक काली पीली टैक्सी रोकी और हम तीनों लोग घर उस पर बैठ कर वापस आ गए। उन दोनों के बीच कुछ न कुछ तो था ही, वर्ना अमिताभ कम से कम शबाना को विश किए बगैर वापस नहीं आते।"
 
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आज कुछ ऐसे बीत रही है रेखा की जिंदगी 

रेखा ने सबसे ज्यादा नाम कमाया अपनी फिल्म उमराव जान के लिए। सवाल उठता है कि मुजफ्फर अली ने रेखा में आखिर ऐसा क्या देखा कि उन्होंने उमराव जान के रोल के लिए रेखा को चुना?

मुजफ्फर अली बताते हैं, "मैं उस रोल के लिए स्मिता पाटिल को चुन सकता था, लेकिन मैंने रेखा की आँखों में देखा कि वो टूटने का अनुभव समझती हैं। उमराव जान के जीवन की भी यही कहानी थी। रेखा ने इस रोल के लिए बहुत मेहनत की। उन्होंने मेरी उम्मीद से कहीं बेहतर अभिनय किया और स्क्रिप्ट के भी ऊपर निकल गईं।"

1990 में रेखा की मुलाकात दिल्ली के उद्योगपति मुकेश अग्रवाल से हुई। आनन फानन में दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया। यासेर उसमान कहते हैं, "मुकेश अग्रवाल ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे। वो एक कंपनी हॉटलाइन के मालिक थे और दिल्ली में रहा करते थे। उनको फिल्मी सितारों को अपने घर पर दावतें देने का बहुत शौक था। उन्होंने एक घोड़ा खरीद रखा था। जब भी कोई मेहमान उनके फार्म हाउज पर आता था वो घोड़े पर बैठ कर उसे अपने गेट पर रिसीव करते थे"

"मशहूर सोशालाइट बीना रमानी ने रेखा की मुलाकात मुकेश अग्रवाल से करवाई थी। अभी उनको मिले एक महीना भी नहीं बीता था कि मुकेश ने रेखा को शादी के लिए प्रपोज कर दिया। रेखा राजी हो गईं और उन्होंने उसी वक्त जुहू के मुक्तेश्वर देवालय में शादी करने का फैसला कर लिय।।"शादी करते ही दोनों हनीमून मनाने लंदन चले गए। लेकिन वहाँ उन्हें एक हफ्ते के अंदर ही पता चल गया कि वो दोनों एक दूसरे के लिए बने ही नहीं हैं।

यासेर बताते हैं, "रेखा को ये जान कर धक्का लगा कि मुकेश रोज दवाएं लेते हैं और डिप्रेशन के मरीज हैं। एक दिन मुकेश ने रेखा से स्वीकार किया कि उनके जीवन में भी एक एबी है। रेखा के एबी के बारे में तो सबको पता था लेकिन मुकेश की एबी उनकी मनोचिकित्सक थीं। इसके बाद रेखा ने मुकेश से दूरी बनानी शुरू कर दी और छह महीने के अंदर ही उन्हें तलाक के कागज भिजवा दिए। मुकेश अग्रवाल इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाए और एक दिन उन्होंने दुपट्टे का फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली।"

आज रेखा ने अपने आप को सुचित्रा सेन के मोड में ढाल लिया है। वो एकाकी जीवन जीती हैं जिसमें बाहरी दुनिया के लिए कोई जगह नहीं हैं। वो राज्य सभा की सदस्य जरूर हैं लेकिन इसकी कार्यवाही में बहुत कम हिस्सा लेती हैं। उन्होंने जिंदगी का बहुत जीवट से मुकाबला किया है और हर बार गिर कर भी बिना किसी मदद के उठ खड़ी हुई हैं।। उनके करीबी लोगों ने उन्हें अक्सर लेट डाउन किया था। शायद इतिहास उनसे बेहतर ढंग से पेश आए। 
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