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Sudipto Sen: कौन हैं सुदीप्तो सेन जिन्होंने 'द केरल स्टोरी' बनाई? बिंदुओं में समझे करियर से लेकर सभी विवाद

Wed, 10 May 2023 01:56 AM IST
रुपाली रामा जायसवाल एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

फिल्म 'द केरल स्टोरी' के साथ-साथ इसके डायरेक्टर सुदीप्तो सेन भी फिलहाल सुर्खियों में हैं। आइए निर्देशक के फिल्मी करियर से लेकर उनसे जुड़े विवादों को भी जान लेते हैं। 
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सुदीप्तो सेन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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जब-जब सच्ची घटनाओं पर फिल्म बनी है, तब-तब उसे कई परीक्षाओं से गुजरना पड़ा है। बीते दिनों जहां 'द कश्मीर फाइल्स' पर छिड़े विवाद ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। तो वहीं, अब 'द केरल स्टोरी' की दिल दहला देने वाली कहानी पर छिड़े विवाद ने देश को दो गुटों में बांट दिया है। इस फिल्म को बनाने के पीछे सुदीप्तो सेन का हाथ है, जो अपने डायरेक्शन को लेकर इन दिनों हर किसी की जुबां पर छाए हुए हैं। एक तरफ उनकी फिल्म को दर्शकों और कुछ राजनीतिक पार्टियों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। तो वहीं, नेटिजन्स और कुछ अन्य पार्टियां 'द केरल स्टोरी' का पुरजोर विरोध करती नजर आ रही हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि सुदीप्तो सेन खुद एक बंगाली हैं, और उनकी फिल्म को पश्चिम बंगाल में ही सबसे पहले बैन कर दिया गया। तो चलिए इस रिपोर्ट में सुदीप्तो सेन के करियर से लेकर उनकी फिल्म 'द केरल स्टोरी' पर गर्माई राजनीति पर बारीकी से गौर फरमा लेते हैं, और ऐसा क्यों है यह भी जान लेते हैं। 

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सुदीप्तो सेन का जन्म 

सुदीप्तो सेन का जन्म  16 जनवरी को जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल में हुआ था। सुदीप्तो ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी जिला स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने कोलकाता में बीटी रोड सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। सुदीप्तो ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से फिजिक्स में ग्रेजुएशन और मनोविज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की।

डॉक्यूमेंट्री से करियर की शुरुआत 

1997 में, सुदीप्तो ने अपने निर्देशन की शुरुआत डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'द अदर वेल्थ' से की। 1998 में, उन्होंने डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'लैंड विद रिपल्स' का निर्देशन किया। 1998 से 2002 तक, सुदीप्तो ने विश्व बैंक के लिए एक सूचीबद्ध निर्माता के रूप में काम किया। 2006 में, उन्होंने अपनी पहली अंग्रेजी फीचर फिल्म 'द लास्ट मॉन्क' का निर्देशन किया। 2008 में, उन्होंने फीचर फिल्म 'एंथिपोनोवेट्टम' के साथ अपने मलयालम निर्देशन की शुरुआत की। 

'द केरल स्टोरी' सबसे चर्चित

इसके बाद सुदीप्तो सेन ने हिंदी फिल्मों का रुख किया और 'लखनऊ टाइम्स' (2015), 'आसमा' (2018), 'गुरु जी: अहेड ऑफ टाइम' (2018), 'गुरुजन' (2022), और 'द केरल स्टोरी' (2023) का निर्देशन किया। सुदीप्तो की फिल्म 'द केरल स्टोरी' उनकी अब तक की सबसे ज्यादा चर्चित फिल्म बन गई है। साथ ही इस मूवी को लेकर अब वामपंथी और दक्षिपंथियों के बीच अलग ही जंग देखने को मिल रही है। 

2018 में ही छिड़ा विवाद 

खैर, आपको जानकर हैरानी होगी कि सुदीप्तो सेन 'द केरल स्टोरी' से पहले साल 2018 में बड़ा विवाद खड़ा कर चुके हैं। सेन का पिछला काम, 'इन द नेम ऑफ लव' भी केरल में महिलाओं के कथित धर्म परिवर्तन के बारे में था। घंटे भर के इस डॉक्यूमेंट्री की लोगों ने जमकर आलोचना की थी। 

शारीरिक हिंसा का शिकार हुए सुदीप्तो 

सुदीप्तो सेन खुद के बताए एक किस्से को लेकर भी खूब सुर्खियां बटोर चुके हैं। निर्देशक ने दावा किया था कि उन पर शारीरिक हिंसा किया गया था, और नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में वामपंथी झुकाव वाले समूहों द्वारा उनकी स्क्रीनिंग को बाधित किया गया था। एक फेसबुक पोस्ट में, उन्होंने कहा कि जेएनयूएसयू ने कला, कलाकारों, कलात्मक अभिव्यक्ति और भाषण की स्वतंत्रता का 'लिंचिंग' और 'बलात्कार' किया था। 

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'द केरल स्टोरी' की कहानी

'द केरल स्टोरी' में फिलहाल चार लड़कियों की कहानी दिखाई जा रही है, लेकिन बीते साल नवंबर के महीने में आए इसके टीजर में इसे 32 हजार महिलाओं की कहानी बताई गई थी। हालांकि, विवाद को बढ़ता देख इसकी संख्या में कटौती कर दी गई।सुदीप्तो सेन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में चारों लड़कियों को लव जिहाद के जाल में फंसाकर आईएसआईएस आतंकी बनाए जाने की कहानी दिखाई गई है।

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सच्चाई दिखाना कर्तव्य- सुदीप्तो 

'द केरल' स्टोरी को लेकर सुदीप्तो सेन का कहना है कि यह उनका देशभक्ति का कर्तव्य था कि जिस तरह से हजारों लड़कियों का धर्मांतरण किया गया और विदेशों में तस्करी की गई, उसका पर्दाफाश होना चाहिए था। उन्होंने साम्यवाद के खिलाफ भी अपना रुख स्पष्ट किया, यह कहते हुए कि यह तेजी से अप्रासंगिक हो गया है और अपनी मौत मर रहा है।

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32 हजार लड़कियों का आंकड़ा क्यों?

वर्ष 2021 में एक इंटरव्यू के दौरान सुदीप्तो सेन ने कहा था कि केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के जरिए केरल विधानसभा को दिए गए आंकड़ों के आधार पर वह 32,000 की संख्या पर पहुंचे। हालांकि, तथ्य की जांच करने वाली एक समाचार वेबसाइट ने पाया कि इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं था। सेन ने मीडिया को बताया था, '2010 में, मैंने एक मामले का दस्तावेजीकरण किया था जहां चांडी ने कहा था कि हर साल लगभग 2,800 से 3,200 लड़कियां इस्लाम अपना रही हैं। बस अगले 10 वर्षों के लिए इसकी गणना करें, और यह संख्या लगभग 32,000 है।'

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सबूत पेश करेंगे सुदीप्तो सेन?

एक अन्य मीडिया संस्थान ने सुदीप्तो सेन से इन दावों का सबूत मांगा, जिस पर उन्होंने कहा, 'असहिष्णुता को चरम पर पहुंचने दें। मैं फिल्म रिलीज होने के बाद अपना डेटा साझा करूंगा। मैं अपनी फिल्म के उद्देश्य को क्यों हराऊं?' सेन के दावों की पुष्टि करने के लिए सार्वजनिक डोमेन में कोई ठोस सबूत नहीं है। उनके अधिकांश ऑनलाइन समर्थकों का कहना है कि संख्या सही हो भी सकती है और नहीं भी। 

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राजनीतिक एजेंडा बनी 'द केरल स्टोरी'

'द केरल स्टोरी' को बैन करने का मुद्दा अब राजनीतिक बन गया है। पश्चिम बंगाल में लगे बैन और उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में इसे टैक्स फ्री किए जाने पर लोग मान रहे हैं कि जहां वामपंथी सरकार है, वहां फिल्म पर रोक लगाया जा रहा है। वहीं, दक्षिणपंथी सरकार इस मुद्दे को ज्यादातर लोगों तक पहुंचाने के लिए फिल्म को टैक्स फ्री कर रही है। 
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