सुदीप्तो सेन का जन्म
सुदीप्तो सेन का जन्म 16 जनवरी को जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल में हुआ था। सुदीप्तो ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी जिला स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने कोलकाता में बीटी रोड सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। सुदीप्तो ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से फिजिक्स में ग्रेजुएशन और मनोविज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की।
डॉक्यूमेंट्री से करियर की शुरुआत
1997 में, सुदीप्तो ने अपने निर्देशन की शुरुआत डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'द अदर वेल्थ' से की। 1998 में, उन्होंने डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'लैंड विद रिपल्स' का निर्देशन किया। 1998 से 2002 तक, सुदीप्तो ने विश्व बैंक के लिए एक सूचीबद्ध निर्माता के रूप में काम किया। 2006 में, उन्होंने अपनी पहली अंग्रेजी फीचर फिल्म 'द लास्ट मॉन्क' का निर्देशन किया। 2008 में, उन्होंने फीचर फिल्म 'एंथिपोनोवेट्टम' के साथ अपने मलयालम निर्देशन की शुरुआत की।
'द केरल स्टोरी' सबसे चर्चित
इसके बाद सुदीप्तो सेन ने हिंदी फिल्मों का रुख किया और 'लखनऊ टाइम्स' (2015), 'आसमा' (2018), 'गुरु जी: अहेड ऑफ टाइम' (2018), 'गुरुजन' (2022), और 'द केरल स्टोरी' (2023) का निर्देशन किया। सुदीप्तो की फिल्म 'द केरल स्टोरी' उनकी अब तक की सबसे ज्यादा चर्चित फिल्म बन गई है। साथ ही इस मूवी को लेकर अब वामपंथी और दक्षिपंथियों के बीच अलग ही जंग देखने को मिल रही है।
2018 में ही छिड़ा विवाद
खैर, आपको जानकर हैरानी होगी कि सुदीप्तो सेन 'द केरल स्टोरी' से पहले साल 2018 में बड़ा विवाद खड़ा कर चुके हैं। सेन का पिछला काम, 'इन द नेम ऑफ लव' भी केरल में महिलाओं के कथित धर्म परिवर्तन के बारे में था। घंटे भर के इस डॉक्यूमेंट्री की लोगों ने जमकर आलोचना की थी।
शारीरिक हिंसा का शिकार हुए सुदीप्तो
सच्चाई दिखाना कर्तव्य- सुदीप्तो
32 हजार लड़कियों का आंकड़ा क्यों?
वर्ष 2021 में एक इंटरव्यू के दौरान सुदीप्तो सेन ने कहा था कि केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के जरिए केरल विधानसभा को दिए गए आंकड़ों के आधार पर वह 32,000 की संख्या पर पहुंचे। हालांकि, तथ्य की जांच करने वाली एक समाचार वेबसाइट ने पाया कि इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं था। सेन ने मीडिया को बताया था, '2010 में, मैंने एक मामले का दस्तावेजीकरण किया था जहां चांडी ने कहा था कि हर साल लगभग 2,800 से 3,200 लड़कियां इस्लाम अपना रही हैं। बस अगले 10 वर्षों के लिए इसकी गणना करें, और यह संख्या लगभग 32,000 है।'
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सबूत पेश करेंगे सुदीप्तो सेन?
राजनीतिक एजेंडा बनी 'द केरल स्टोरी'
'द केरल स्टोरी' को बैन करने का मुद्दा अब राजनीतिक बन गया है। पश्चिम बंगाल में लगे बैन और उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में इसे टैक्स फ्री किए जाने पर लोग मान रहे हैं कि जहां वामपंथी सरकार है, वहां फिल्म पर रोक लगाया जा रहा है। वहीं, दक्षिणपंथी सरकार इस मुद्दे को ज्यादातर लोगों तक पहुंचाने के लिए फिल्म को टैक्स फ्री कर रही है।