भारतीय पॉप गायिका उषा उत्थुप ने आज रविवार को कहा कि दुनिया भर के संगीतकारों को युद्ध और संघर्ष के खिलाफ कड़ा संदेश देने के लिए एकजुट होना चाहिए। इसके साथ ही उषा उत्थुप ने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध पर भी दुख व्यक्त किया।
दरअसल, उषा उत्थुप ने एपीजे कोलकाता लिटरेरी फेस्टिवल में शिरकत की थी। यहां उषा उत्थुप ने अपने यूरोप की यात्रा के दिनों को याद करते हुए कहा कि रूस और यूक्रेनियन दोनों ने उनके 'डार्लिंग आंखों से आंखें चार करने दो' गाने का आनंद लिया था। इसमें उषा उत्थुप ने स्थानीय शब्दों को गीत के बोल में पिरोकर गया था। बता दें कि, फिल्म 'सात खून माफ' का गाना रूसी मार्चिंग गाना 'कलिंका' का से मिलता जुलता है।
गायिका उषा उत्थुप ने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध पर अपना दुख जताते हुए कहा कि संगीतकार शांति दूतों की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा, 'दुनिया के सभी संगीतकारों को एकजुट होकर युद्ध और संघर्ष के खिलाफ शांति के लिए कुछ करना चाहिए। हम पहले दुनिया के नागरिक हैं।'
इस दौरान उषा उत्थुप ने अपने संघर्ष के दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में साल 1969 में शहर के पार्क स्ट्रीट पर ट्रिनकास रेस्तरां में उन्होंने एक गाना गाया था। वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे। जैसे ही उन्होंने गाना शुरू किया तो सबने उन्हें स्वीकार किया और उनकी सराहना की। इसके साथ ही उषा ने अपने करियर में पति की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, 'उन्होंने मुझे बढ़ने दिया। उड़ने दिया। मुझे मजबूत परिवार का समर्थन मिला।'