विनीता सिंह ने भावुक नोट शेयर करते हुए लिखा है, 'मैं आखरी आई।' इसके बाद उन्होंने आगे लिखा है, 'मैं स्विमिंग को लेकर हमेशा संघर्ष करती रही हूं। हालांकि, दुर्भाग्य से सभी ट्रायथलॉन स्विमिंग से शुरू होती हैं। वह भी खुले समुद्र में होती है। पिछले सप्ताह शिवाजी ट्रायथलॉन मेरे जीवन की सबसे कठिन रेस थी। इसमें बहुत लहरें उठ रही थी और हवा चल रही थी। इसके चलते मुझे पैनिक अटैक आ गया। वह भी 1 घंटे था। हालांकि, कई लोगों ने मेरा मनोबल बढ़ाया। मैं सांस नहीं ले पा रही थी, तो मैंने उन्हें ले चलने के लिए कहा। मुझे रेस्क्यू टीम उठाकर लेकर आई और मैंने क्विट करने करने का निर्णय लिया जो कि मेरे लिए बहुत पेनफुल था'।
विनीता सिंह ने आगे लिखा है, 'शिवाजी झील उस समय बहुत उफान पर थी। मेरे पास कोई साहस नहीं था। जब मैं नाव में बैठकर वापिस आ रही थी, तब मैंने देखा कि एक 9 साल की बहादुर लड़की लहरों से लड़ते हुए आगे बढ़ रही थी।मैंने रेस छोड़ने का मन बना लिया था। मैंने ट्रेनिंग भी पूरी नहीं की थी लेकिन मैंने अपने दिमाग को चुनौती दी। रेस में कोई टाइमिंग का बंधन नहीं था, तो मेरे पास कोई एसक्यूज नहीं था। इसके चलते मैं एक बार फिर पानी में कूद गई।'
विनीता सिंह आगे बताती है, 'मैंने स्विम करना शुरू किया। जो चीज 39 मिनट में होती थी, इसे करने में मुझे डेढ़ घंटे लगे लेकिन अंत में मैं पानी से बाहर निकली, जहां सभी लोगों ने अपनी रेस 10:30 बजे तक पूरी कर ली थी। मुझे इसे पूरा करने में दोपहर के 12:20 लगे। मुझे 100 नेवी के जवान चियर कर रहे थे। मैं सभी आईएनएस शिवाजी के लोगों का आभार व्यक्त करती हूं। मैंने अंत में आकर अपने बच्चों से कहा कि मां आज अंतिम आई है लेकिन मां ने क्विट नहीं किया है'।
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