जब दर्द बढ़ा तो सर्जरी कराने की नौबत आई
शमिता ने कुछ महीने यही सोचकर निकाल दिए कि उनको कोई बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम नहीं। वह आगे कहती हैं, ‘हम जो दर्द महसूस करते हैं, उसे असल में जाहिर नहीं करते हैं। बहुत सी चीजें, चाहे वह पीरियड का दर्द हो या हार्मोन से जुड़ी कोई बात, औरतों के लिए नॉर्मल मान ली जाती हैं। हमसे बस यही उम्मीद की जाती है कि हम उनके साथ ही जिएं। मेरे मामले में, सर्जरी से लगभग छह से आठ महीने पहले दर्द की तीव्रता सच में बहुत बढ़ गई थी।’
शमिता आगे कहती हैं, ‘मैं भी बहुत कन्फ्यूज्ड थी क्योंकि यह सब उसी समय हुआ जब मैं पेरिमेनोपॉज के बारे में जान रही थी। मेरे हार्मोन्स में पहले से ही बहुत बदलाव हो रहे थे, इसलिए मैं समझ नहीं पा रही थी कि जो मैं महसूस कर रही हूं, वह पेरिमेनोपॉज का ही हिस्सा है या कुछ और गड़बड़ है।’
बाद में शमिता को एंडोमेट्रियोसिस प्रॉब्लम का पता चला और उनको सर्जरी करवानी पड़ी।