संजय दत्त ने बनारस के गंगा तट पर पिता सुनील दत्त और मां नरगिस दत्त समेत तीन पीढ़ी के पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। रानी घाट पर संजू बाबा ने जब पिंडदान शुरू किया, तभी बारिश होने लगी। काशी के आठ पुरोहितों ने शंखनाद के बाद सस्वर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पिंडदान कराया।
इस दौरान घाट की सीढ़ियों तक संजय दत्त की झलक पाने के लिए उनके प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बाबतपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से संजय दत्त और सिने तारिका अदिति राव हैदरी अपनी आने वाली फिल्म ‘भूमि’ के अन्य कलाकारों के साथ दोपहर को रानी घाट पहुंचे।
पं. राजेंद्र शर्मा के आचार्यत्व में पुरोहित कैलाश मिश्र, नित्यानंद शर्मा, ब्रम्हपद, अवधेश दुबे, शुभम पाराशर, कार्तिक, देवेश तिवारी, विवेक मिश्रा और अथर्व शर्मा ने पहले शंखनाद दिया। इसके बाद मंत्रोच्चारण के साथ पिंडदान आरंभ हुआ। कुछ देर में ही बारिश होने लगी।
पढ़ें- पहली फिल्म के लिए संजय दत्त को मिली थी इतनी फीस, जानें संजू बाबा से जुड़ी कुछ खास बातें
रानी घाट पर पिंडदान के लिए कोलकता से आए कारीगरों के द्वारा वातानुकूलित पंडाल और गेंदा, गुलाब के अलावा अन्य फूलों, रंगों से रंगोली बनाई गई थी। हरी घास, दूर्वा से पंडाल सजाया गया था। संजय दत्त ने अपनी मां नरगिस, पिता सुनील दत्त के साथ दादा-दादी और परदादा-परदादी का पिंडदान किया।
पिंडदान के बाद संजू बाबा ने 125 लीटर दूध से मां गंगा का अभिषेक किया। इसके बाद आरती उतारी। पिंडदान के बाद संजू बाबा ने पुरोहितों को दक्षिणा देकर विदा किया।