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इन फिल्मों ने भुनायी संजय दत्त की बुरी इमेज

Thu, 21 Mar 2013 11:26 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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फिल्म इंडस्ट्री हर कलाकार की व्यक्तिगत इमेज को भुनाना खूब जानती है। 1993 के मुंबई विस्फोट में संजय दत्त का नाम जैसे ही चर्चा में आना शुरू हुआ फिल्मकारों ने उनकी इस बुरी इमेज के अनुरूप रोल गढ़ने शुरू कर दिए।
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1993 में मुंबई विस्फोट के साल ही संजय दत्त की फिल्म 'खलनायक' रिलीज हुई। सुभाष घई की इस फिल्म में अलग बात यह थी कि फिल्म के नायक को ही खलनायक बनाकर पेश किया गया था। "नायक नहीं खलनायक हूं मैं" गाना उस समय खूब चर्चित हुआ।

यह फिल्म सुपरहिट रही। इसके लिए संजय दत्त अवॉर्ड भी मिला। 'खलनायक' हिट होने के बाद संजय दत्त की सो कॉल्ड बुरी इमेज को भुनाने के लिए फिल्मकारों में होड़ सी लग गयी। 1999 में रिलीज हुई फिल्म 'वास्तव' में संजय दत्त एक बार फिर गैंगस्टर के रोल में दिखे। यह फिल्म भी हिट रही।
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2002 में 'खौफ' फिल्म में संजय दत्त फिर से बुरे दिखे। यह फिल्म उतनी नहीं चली पर संजय की बुरे व्यक्ति की इमेज दर्शकों को रास आयी। संजय अब फिल्मों में अजीब से गेटअप के साथ दिखने लगे। ऐसा गेटअप जो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पारंपरिक हीरो की इमेज से बिल्कुल अलग था।

2002 में रिलीज हुई 'हथियार' और 'कांटे' फिल्म में भी संजय दत्त बुरे आदमी के किरदार में दिखे। यह फिल्में सफल रहीं और संजय की यह इमेज और पुख्ता होती गयी।

2004 में रिलीज हुई 'मुसाफिर' में संजय दत्त एक किलर के रूप में दिखे। 2007 में फैसला आने के बाद संजय दत्त बुरे आदमी के किरदार में दिखे लेकिन उनका किरदार कॉमिक रहा। 'अग्निपथ' फिल्म में संजय दत्त कांचा नाम के खतरनाक अपराधी की भूमिका में दिखे।
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संजय दत्त को सजा हो या न हो संजय दत्त की गैंगस्टर और अंडरवर्ल्ड इमेज पर फिल्में बननी एक बार फिर से शुरू हो सकती हैं।
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