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Jaya Bachchan: मणिपुर हिंसा को लेकर जया बच्चन का फूटा गुस्सा, बोलीं- 'यह शर्म की बात है'

Mon, 24 Jul 2023 12:32 PM IST
प्रियंका नेगी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

समाजवादी पार्टी सांसद जया बच्चन ने विपक्षी दलों के प्रदर्शन के दौरान मणिपुर के मुद्दे पर जुबानी हमला बोलते हुए प्रतिक्रिया दी है।

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जया बच्चन - फोटो : social media
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विस्तार
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मणिपुर पिछले ढाई महीने से हिंसा की आग में झुलस रहा है। हालात तब और बिगड़ गए जब 19 जुलाई को दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने का वीडियो सामने आया। जिसके बाद देशभर में इसे लेकर गुस्सा देखने को मिला। राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। महिलाओं के साथ हुए अत्याचार के खिलाफ सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठाई जा रहा है। आम जनता से लेकर सेलिब्रिटीज मणिपुर हिंसा को लेकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। इस बीच मणिपुर हिंसा को लेकर बॉलीवुड एक्ट्रेस और समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन का गुस्सा फूटा है।

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जया बच्चन ने बताया शर्म की बात
समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने संसद में कहा, ''मैं इससे ज्यादा क्या कह सकती हूं कि मणिपुर की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है लेकिन हमारे देश में नहीं। यह शर्म की बात है। जया बच्चन से पहले कई फिल्मी सितारे मणिपुर हिंसा पर अपना गुस्सा जाहिर कर चुके हैं। इनमें अक्षय कुमार, रेणुका शहाणे, आशुतोष राणा, अनुपम खेर, विवेक अग्निहोत्री, सोनू समेत कई सेलेब्स का नाम शामिल है।

जया बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया
ढ़ाई महीने से सुलग रहा मणिपुर
मणिपुर में करीब ढ़ाई महीने से हिंसा का दौर जारी है। अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे महिलाओं से अभद्रता के विचलित कर देने वाले वीडियो ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर हिंसा पर चुप्पी साधने के बाद गुरुवार को संसद सत्र के पहले बयान देकर घटना को पूरे देश को शर्मसार करने वाला करार दिया है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से मामले पर कठोर निर्णय लेने का आह्वान किया है।
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चुराचांदपुर से हुई थी हिंसा की शुरुआत
मणिपुर में तीन मई को हिंसा की शुरुआत चुराचांदपुर जिले से हुई थी, जो राज्य की राजधानी इंफाल के दक्षिण में करीब 63 किलोमीटर की दूरी पर है। इस जिले में कुकी आदिवासी ज्यादा हैं। गवर्नमेंट लैंड सर्वे के विरोध में 28 अप्रैल को द इंडिजेनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने चुराचंदपुर में आठ घंटे बंद का एलान किया था। देखते ही देखते इस बंद ने हिंसक रूप ले लिया। उसी रात तुइबोंग एरिया में उपद्रवियों ने वन विभाग के ऑफिस को आग के हवाले कर दिया। 27-28 अप्रैल की हिंसा में मुख्य तौर पर पुलिस और कुकी आदिवासी आमने-सामने थे।

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