अनुभवी पटकथा लेखक जावेद अख्तर के छोटे भाई, लेखक-मनोविश्लेषक सलमान अख्तर अपनी नई पुस्तक 'घर का भेदी' के प्रचार में जुटे हुए हैं। इसी दौरान उन्होंने उनके और उनके बड़े भाई के बीच दरार को संबोधित किया। सलमान की किताब में जावेद को समर्पित एक अध्याय भी शामिल है। उन्होंने खुलासा किया कि दशकों तक संपर्क में नहीं रहने के बावजूद, दोनों भाई सहज रूप से जुड़े हुए हैं। किताब में जावेद की पांच कविताएं शामिल होने के बावजूद, सलमान ने वर्षों से उनसे कोई व्यक्तिगत बातचीत नहीं की है।
द लल्लनटॉप के साथ एक इंटरव्यू में, जब उनसे इस स्पष्ट विरोधाभास के बारे में पूछा गया तो सलमान ने विडंबना को नजरअंदाज करते हुए कहा, 'मैं फ्रायड के बारे में लिखता हूं, मैं उनसे कभी नहीं मिला, मैं महान मनोविश्लेषक डोनाल्ड विनीकॉट के बारे में लिखता हूं, मैं उनसे कभी नहीं मिला। मैंने फैज के बारे में भी लिखा है, लेकिन उनसे कभी मुलाकात नहीं हुई। इसलिए, उनके (जावेद) बारे में लिखना, लेकिन उनसे न मिल पाना मेरी राय में कोई विरोधाभास नहीं है। दोनों चीजें संभव हैं।'
सुलह के विषय पर, सलमान ने मजाक में कहा, 'अगर वह मुझसे बात करना चाहते हैं, तो यह एक अच्छा विकल्प है क्योंकि मैं एक बहुत ही सभ्य व्यक्ति हूं।' हालांकि, उन्होंने अपने अलगाव के सटीक कारणों की गहराई से चर्चा नहीं की और टिप्पणी की, 'बहुत सारी चीजें होती हैं, और इन चीजों में बारीकियां होती हैं, वे बहुत जटिल होती हैं। वे ऐसे मामले नहीं हैं जिन पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा की जा सके। वह बहुत विद्वान, बुद्धिमान, तीक्ष्ण बुद्धि वाले व्यक्ति हैं और कई मायनों में बहुत अच्छे कवि हैं। वह एक चतुर, प्रतिभाशाली व्यक्ति हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है।'
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सलमान ने अपनी बात में आगे जोड़ा, 'हम मिलें या न मिलें, लेकिन हम सहज रूप से बहुत करीब हैं। हम एक दूसरे को बहुत अच्छे से जानते हैं। वह जानते हैं कि मैं क्या करूंगा और क्या सोचूंगा, मुझे पता है कि कौन सा चुटकुला उन्हें हंसाएगा। हमारे पास यह सहज संबंध है। भाषा और शारीरिक आदान-प्रदान से कहीं अधिक गहरे संबंध हैं।' यह पहली बार है जब सलमान अख्तर ने जावेद से अपने अलगाव के बारे में खुलकर बात की है। हालांकि, वह अपने पिता के साथ अपने जटिल रिश्तों को लेकर काफी मुखर रहे थे।