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पैडी फेस्टिवल के मंच पर गूंजेगा गांव-कस्बों का लोक संगीत

Thu, 13 Oct 2016 09:06 AM IST
अमित कर्ण। अमर उजाला मुंबई।
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पॉप और रैप संगीत की लोकप्रियता भरे दौर में बॉलीवुड की संगीत बिरादरी कुछ अनूठा करने जा रही है। वह गांव और कस्बों में चर्चित लोकसंगीत को मुकम्मल मंच प्रदान करने की खातिर मुंबई में पैडी फेस्टिवल आयोजित करवा रही है। 15 और 16 अक्टूबर को मुंबई एग्जीबिशन सेंटर में इस आयोजन के तहत भारत के विभिन्न इलाकों के लोकसंगीत को पेश किया जाएगा।
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इस फेस्टिवल की मेजबानी सिद्धार्थ काक करेंगे। वही सिद्धार्थ काक, जिन्हें लोग रेणुका शहाणे के साथ बरसों पहले दूरदर्शन पर मशहूर शो सुरभि की मेजबानी करते देख चुके हैं। आयोजन की जानकारी संगीतकार जोड़ी सलीम-सुलेमान ने दी। सलीम ने कहा, 'हमारी पहचान सिर्फ बॉलीवुड म्यूजिक से नहीं है।

करियर की शुरुआत में हमने 1996 में लोकगीतों का एलबम लॉन्‍च किया। वह एलबम आया और गया। उसके बाद हमने बॉलीवुड गीत-संगीत में ही रमना मुनासिब समझा। उसके जरिए हमें पहचान मिली, मगर हमारी रगों में लोक गीत और संगीत ही बहता है। हमें खुशी है कि आज दो दशक बाद जिंदगी ने हमें वहीं ला खड़ा किया है। इस आयोजन के जरिए हम लोकसंगीत को आगे लाना चाहते हैं, जो हाशिए पर जा चुका है।
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-विदेशों में लोकसंगीतों को ऊंचा दर्जा

सुलेमान ने लोकसंगीत की अहमियत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा,'ऐसा सिर्फ हिंदुस्तान में है, जहां फिल्मी संगीत को जरूरत से ज्यादा अहमियत मिली हुई है। बाहर ऐसा नहीं है। लंदन और अमेरिका में लोकसंगीत सबसे ऊंचे पायदान पर है। वहां के म्यूजिक स्टोर में फिल्मी गीतों की सीडी नहीं मिलती। वहां लोकसंगीत की सीडी ही मिलती है। अच्छी बात यह है कि लोकगीतों में विदेशी संगीत का पुट हो जाए तो वह थिरकने पर मजबूर कर देता है। हम उम्मीद करते हैं कि पैडी फेस्टिवल लोगों को लोकसंगीत की भरपूर खुराक देगा। पैडी का मतलब धान होता है। जमीन और जडों से जुड़ा हुआ। वही संगीत हम लोगों को देंगे। यह दुर्भाग्य ही है, जो लोकसंगीत लुप्तप्राय है। फिल्मों से इतर बाकी मंचों पर भी फिल्मी संगीत की ही डिमांड है।

-सरहद पार वालों को रोका जाए

पाकिस्तानी कलाकारों और गीतकार-संगीतकारों के खिलाफ बॉलीवुड का सारा खेमा लामबंद हो रहा है। पहले फिल्म निर्माताओं के संगठन इम्पा ने उन पर प्रतिबंध लगाया। अब संगीत बिरादरी भी यह मानती है कि मौजूदा माहौल में पाकिस्तान की प्रतिभाओं के भारत में काम करने पर रोक लगी रहनी चाहिए। मुंबई में कुछ देर पहले एक कार्यक्रम में इस संगीतकार जोड़ी ने इसकी पुष्टि की। उनसे जब पूछा गया कि संगीत की कोई सरहद नहीं होती, पर इन दिनों सरहद पार की वैसी प्रतिभाओं को रोका जा रहा है। इस पर सलीम ने पहले तो अमर उजाला के पत्रकार से सवाल किया कि वे क्या चाहते हैं? पत्रकार ने उन्हें जवाब दिया कि जो देश की जनता चाहती है।
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saleem suleman
यह उत्तर मिलने पर सलीम ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, ' देश की जनता यह चाहती है कि सरहद पार की प्रतिभाओं को रोका जाए। हम हिंदुस्तानी हैं और हम सबके दिलों में सबसे पहले वह भावना जागृत होनी चाहिए। बस।' सुलेमान ने भी सलीम के सुर में सुर मिलाया।

उन्होंने कहा,' यह सही है कि संगीत की कोई सरहद नहीं होती, मगर सरहद खींची तो गई है। दूसरी चीज हमारी इंडस्ट्री से जुड़ी हुई है। वह यह उसका एक नियम होता है। उसका एक लहजा होता है। जब इंडस्ट्री एकजुट हो पूरे गर्व के साथ कहती है कि फलां फैसला लिया गया है तो हमें उसका सम्मान करना चाहिए। आज जब इस मसले पर इंडस्ट्री ने फैसला ले लिया है तो हम इसका पालन करेंगे, क्योंकि हम इस बिरादरी के हिस्सा हैं।

आज अगर हम छह आर्टिस्ट इस एक मंच पर हैं। इनमें से एक बोलता है कि उसे एक चीज अच्छी नहीं लग रही तो हमें उस आवाज की मुखालफत नहीं करनी चाहिए। वह इसलिए कि संगीत का मतलब ही एकजुट होना है। आज पता नहीं पाकिस्तानी कलाकारों के खिलाफ किसने आवाज उठाई है, मगर आवाज उठी तो है। लिहाजा हम उसका सम्मान और अनुशरण तो करेंगे।
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