अच्छे रोल की तलाश में राहुल
साउथ फिल्मों के बारे में बात करते हुए राहुल देव ने कहा कि साउथ की फिल्मों को 70 और 80 के दशक के तर्ज पर ही बनाया जा रहा है। इन फिल्मों में लगभग एक ही तरह की कहानियों पर बात की जाती है। उनके डायलॉग्स भी जीवन से बड़े होते हैं। ऐसी फिल्मों में एक्टर्स का एक्शन सीक्वेंस देखने में मजा आता है, जो रियल लाइफ से एकदम अलग होते हैं। साउथ इंडस्ट्री के पास कहानी सुनाने का एक तरीका है और लोग इसे समझते हैं। एक ही तरह की कहानी होने के बावजूद साउथ की फिल्में अच्छा प्रदर्शन करती हैं, क्योंकि फिल्म की कहानी इस तरह से बयां की जाती है कि दर्शक मोहित हो जाते हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि मेरे पास भी ऐसे रोल आएंगे।
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ओटीटी पर क्या बोले राहुल
राहुल ने अपने अभिनय करियर के बारे में बात करते हुए कहा कि आज के दौर में स्किल के हिसाब से ओटीटी पर अच्छी फिल्में और वेब सीरीज बन रही हैं। मैं एक एजुकेटेड फैमिली से हूं और चीजों को समझता हूं तो जब भी मुझे ऐसी कोई फिल्में देखनी होती हैं तो मैं ऐसे में अपने दिमाग को साइड में रख देता हूं। रियल लाइफ और रील लाइफ के एक्शन सीन्स में जमीन आसमान का अंतर होता है, लेकिन लोग ऐसे कमर्शियल फिल्में देखना पसंद करते हैं। हम कौन हैं यह निर्णय लेने वाले कि क्या सही है और क्या गलत। क्रिएटिविटी का कोई दायरा नहीं होता। रचनात्मकता किसी भी तरह से व्यक्त की जा सकती है।
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