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नोएडा पहुंचा रागगीरी का खूबसूरत कारवां

Sat, 23 Apr 2016 10:57 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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रागगीरी का कारवां शनिवार को नोएडा के बाल कुटीर पहुंचा। बालकुटीर में रहने वाले बेसहारा बच्चों को रागगीरी की टीम ने संगीत के महत्व के बारे में बताया। रागगीरी देश में शास्त्रीय संगीत के प्रचार प्रसार के लिए काम करने वाली संस्था है। इसके अलावा रागगीरी समाज के वंचित तबके को संगीत से जोड़ने का काम करती है। जिससे उनकी तकलीफ, उनके दुख दर्द को संगीत के जरिए भुलाया जा सके। इस कड़ी में रागगीरी बेसहारा बच्चों के साथ साथ नेत्रहीन बच्चों, ओल्ड एज होम में रहने वाले बुजुर्गों, कैंसर रोगियों के लिए संगीत के कार्यक्रम करती रहती है।
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आज के कार्यक्रम की शुरूआत में किराना घराने के जाने माने कलाकार उस्ताद आरिफ अली खान और गिरिजेश कुमार ने की। ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ और ‘तेरी है जमीन तेरा आसमां’ जैसे भजन के साथ कार्यक्रम की शुरूआत करने के बाद मंच बालकुटीर के बच्चों को सौंप दिया गया। छोटे छोटे बच्चों ने अपने मन की उड़ान भरते हुए भजन से लेकर फिल्मी गीत सब कुछ गाए। ‘हर देस में तू, हर भेष में तू’ के अलावा ‘उम्मीदों के सूरज निकले चारों ओर’ जैसे गाने गाए। इसी दौरान रागगीरी संस्था की तरफ से बच्चों को देश के महान शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी, उस्ताद बिसमिल्लाह खान, पंडित रविशंकर और एमएस सुब्बुलक्ष्मी के बारे में भी बताया गया। बच्चों को राग भैरव और राग भोपाली के बारे में भी जानकारी दी गई।

जल्दी ही रागगीरी बालकुटीर संस्था के बच्चों को मुफ्त संगीत भी सिखाएगी। शास्त्रीय संगीत में जिन बच्चों की दिलचस्पी होगी, उनका चयन करने के बाद संगीत की कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी। रागगीरी दिल्ली के नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्लाइंड में पहले से ही इस तरह की कक्षाएं चला रही है। जहां गंधर्व महाविद्यालय के टीचर नेत्रहीन बच्चों को संगीत की शिक्षा देते हैं। इस बारे में रागगीरी के संस्थापक शिवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि हमारा मकसद है कि इन बच्चों को जल्दी ही बड़े बड़े मंच पर जगह दी जाए।
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उन्होंने बताया कि रागगीरी हर साल शास्त्रीय संगीत के कुछ बड़े कार्यक्रमों का आयोजन करती है, हमारा मकसद है कि कार्यक्रम की शुरूआत में ऐसे बच्चों को भी स्टेज दिया जाए जिन्हें समाज अक्सर अनदेखा कर देता है। रागगीरी ने हाल ही में सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर मुहिम छेड़ी थी कि शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रमों में 8 साल से छोटे बच्चों को भी जाने की अनुमति मिलनी चाहिए। इस मुहिम को जानी मानी शास्त्रीय गायक शुभा मुदगल का साथ भी मिला, उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि बच्चों को कार्यक्रमों में आने से रोकने का फैसला कलाकारों का नहीं बल्कि आयोजकों और ऑडिटोरियम का होता है। रागगीरी एक रजिस्टर्ड ट्रस्ट है। आप रागगीरी संस्था से raaggiri@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।
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