आरके स्टूडियो देश की धरोहर से कम नहीं, ये ज्यादातर लोग जानते भी हैं और मानते भी हैं। लेकिन कई प्रेम कहानियों को कहने वाले इस स्टूडियो का 'रोमांस' से खास कनेक्शन है ये कम ही लोगों को पता होगा। दरअसल कम ही लोग जानते होंगे कि सत्यम- शिवम-सुंदरम, प्रेम रोग, प्रेम ग्रंथ, राम तेरी गंगा मैली हो गई जैसी बेमिसाल मोहब्बत की कहानियों को पर्दे पर जिंदा कर देने वाले अार.के स्टूडियो के 'लोगो' का इतिहास भी बेहद रोचक या यों कहें रोमांटिक है।
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रसियन लेखक लियो टॉलस्टाय के 'रुत्जर सोनाटा' नाम के नोवेला से इस थीम को लिया था एक महान पेंटर रिनी फ्रेंक्वाइस जेवियर ने। नोवेला यानि एक ऐस कृति जो नॉवेल के मुकाबले छोटी मगर शार्ट स्टोरीज के मुकाबले बड़ी हो। नावेला एक बेहद रोमांटिक कहानी पर आधारित है। इसमें द्वंद्व भी थे तो कई सवाल भी। टॉलस्टाय ने इस नोवेला को 1889 में लिखा था इससे प्रेरित होकर रिनी फ्रेंक्वाइस जेवियर ने 1901 में बनाई पेंटिंग बनाई थी। हालांकि आरके स्टू़डियो ने कभी इस बात को दर्ज नहीं किया मगर जब आप इस पेंटिंग को देखेंगे तो एहसास होगा कि आरके स्टूडियो का लोगो और ये पेंटिगं एक दूसरे की कार्बन कॉपी हैं। जरूर इस पेंटिंग पर राजकपूर की नजर पड़ी होगी और उन्हें लगा होगा इससे बेहतर लोगो हो ही नहीं सकता।
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आरके स्टूडियो की स्थापना भारत की आजादी के ठीक एक साल बाद 1948 में हुई थी। फिल्म इंडस्ट्री को ये नायाब तोहफा दिया था सुपरस्टार राजकपूर ने। एक से एक बेहतरीन फिल्मों की झड़ी लगाने वाला ये आरके स्टूडियो भारत के लिए किसी धरोहर से कम नहीं है। स्टूडियो में लगी आग से पूरी फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि फैंस भी बेहद दुखी हैं। बूट पॉलिश, आवार, श्री 420, जागते रहो जैसी सामाजिक चेतना को जगाने वाली फिल्में दीं तो रोमांस की हदों को लांघती ऐसी फिल्में दीं जो मिसाल बन गईं। सत्यम, शिवम, सुंदरम, प्रेम रोग, प्रेमग्रंथ, राम तेरी गंगा मैली हो गई।