महेश भट्ट ने क्यों छोड़ा ओशो का साथ?
महेश भट्ट पहले भी अपनी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में खुलकर बात कर चुके हैं। उन्होंने बताया था कि अपने शुरुआती फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद वो जवाब तलाश रहे थे।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वो ‘स्पिरिचुअल सुपरमार्केट’ में पहुंच गए थे। उन्होंने कहा था, ‘मैं ओशो रजनीश के पास गया, जो पुणे के एक करिश्माई गुरु थे। मैंने खुद को पूरी तरह उन्हें समर्पित कर दिया… केसरिया कपड़े पहनता था और दिन में पांच बार ध्यान करता था।’
लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वो अंदर से जैसा महसूस कर रहे हैं, वो बाहर से दिखा नहीं रहे। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगा कि मैं अभी भी ईर्ष्या महसूस करता हूं, लेकिन पवित्र बातें बोल रहा हूं… मैं खुद को ढोंगी महसूस करने लगा था। मैं दुनिया और खुद से झूठ नहीं बोल सकता।’
महेश भट्ट ने बताया कि इसी वजह से उन्होंने माला फेंक दी। उन्होंने अपने दोस्त विनोद खन्ना से कहा था, ‘ये सब बेकार है, मैं बेवकूफ हूं।’
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