फिल्म पुरस्कारों में अपनी खास जगह बना चुके अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी पुरस्कार (आइफा) की इस साल की मेजबानी को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। नेपाल की संसद में फिल्म एवं सांस्कृतिक मामलों से जुड़े एक खास दल ने नेपाल की आइफा मेजबानी को लेकर विरोध जताया है। वहीं आइफा ने भी एक बयान जारी कर इस साल के पुरस्कारों के मेजबान देश के लिए नेपाल के नाम पर अंतिम फैसला न होने की बात कह कर मामले को और जटिल बना दिया है।
साल 2000 में शुरू हुए आइफा पुरस्कारों के नेपाल में आयोजन को लेकर हाल ही में वहां की संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन नेपाल में पुरस्कारों के आयोजन को लेकर विरोध शुरू हो गया है। अब आइफा आयोजकों ने एक बयान जारी कर कहा है कि उन्होंने नेपाल को इस साल के आइफा पुरस्कारों के आयोजक का दर्जा अभी तक दिया ही नहीं है। बयान के मुताबिक आइफा की मेजबानी के लिए दुनिया के कई देशों के नाम पर अब भी विचार किया ही जा रहा है और इन्हीं देशों में से नेपाल भी रहा।
आइफा की आयोजक कंपनी विजक्राफ्ट इंटरनेशनल के निदेशक विज आंद्रे टिमिन्स ने कहा कि आइफा की सकारात्मक उपलब्धियों को देखकर हमें लगातार कई देशों से उनके शहरों में आइफा के आयोजन के लिए निमंत्रण आते रहते हैं। नेपाल ने इस साल के पुरस्कारों की मेजबानी के लिए संपर्क का है लेकिन अभी नेपाल क नाम संभावितों की सूची में ही है। अगर इस बारे में नेपाल का कोई संस्थान कोई दावा करता है तो वह सच नहीं है। इस तरह के दावों से अगर किसी कॉरपोरेट घराने या किसी दूसरे शख्स को कोई नुकसान होता है तो आइफा इसकी जिम्मेदारी नहीं उठाएगा।
वहीं, इस विवाद के चलते नेपाल पर्यटन विभाग के सीईओ दीपक राज जोशी ने भी आइफा मेजबानी से हाथ खड़े कर दिए हैं। वह कहते हैं कि पुरस्कारों के आयोजन को लेकर मिली शिकायतें नेपाल के लिए एक सबक हैं। नेपाल इस तरह के पुरस्कारों के लिए खुद को अगले दो तीन साल में पूरी तरह तैयार कर लेगा। वर्ष 2000 में शुरू किए हुए अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी अवॉर्ड (आइफा) का इस साल 20वां साल है। बीते 19 सालों के दौरान चार अलग अलग महाद्वीपों के करीब एक दर्जन देशों में आइफा का आयोजन किया जा चुका है।