बॉलीवुड फिल्मों 'सलाम बॉम्बे', 'खामोशी' और 'वेलकम' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय के लिए मशहूर नाना पाटेकर का गुरुवार तड़के निधन हो गया। उनका निधन गोवा स्थित उनके आवास पर हुआ। वह 76 वर्ष के थे। बताया जाता है कि पाटेकर को दिल का दौरा पड़ा था। इस बीच हम आपको नाना पाटेकर के कुछ सामाजिक कामों के बारे में बता रहे हैं।
कारगिल युद्ध में शामिल होना चाहते थे नाना
यह साल 1999 था। नाना पाटेकर अपनी फिल्म की शूटिंग में बिजी थे। जब उन्हें पता चला कि 1999 में कारगिल का युद्ध शुरू हो गया है। इसके बाद नाना पाटेकर तुरंत अपना सारा काम छोड़कर कारगिल युद्ध में शामिल होने के लिए तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को फोन करते हैं। नाना पाटेकर ने रक्षा मंत्री से कहा, मैं कारगिल युद्ध में शामिल होना चाहता हूं।
नाना पाटेकर
- फोटो : सोशल मीडिया
तत्कालीन रक्षा मंत्री ने नहीं दी इजाजत
तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस शुरुआत में तो नाना पाटेकर की मांग को रिजेक्ट कर देते हैं। लेकिन इसके बाद जब उनको पता चलता है कि नाना पाटेकर ने अपनी फिल्म 'प्रहार' की शूटिंग के दौरान 6 महीने तक आर्मी के साथ रहकर ट्रेनिंग की थी।
नाना को मिमी इजाजत
इसके बाद नाना पाटेकर को कारगिल युद्ध में शामिल होने की इजाजत मिल जाती है, परमिशन के बाद 60 दिनों तक टेरिटोरियल आर्मी में रहकर नाना पाटेकर कारगिल युद्ध में अपनी सेवाएं करते हैं। नाना पाटेकर उस दौरान कारगिल युद्ध में शोपियां, बारामुला, कुपवाड़ा और द्रास जैसे सेक्टर में भी कई दिनों तक रहे थे।
घट गया था नाना का वजन
नाना पाटेकर का कारगिल युद्ध के दौरान 75 किलो के करीब वजन था,लेकिन 60 दिनों तक आर्मी की सेवा करने के बाद उनका वजन 20 किलो तक घट गया था।
नाना पाटेकर
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नाना ने की किसानों की मदद
नाना पाटेकर की शानदार एक्टिंग के पीछे एक ऐसा नागरिक भी था जो सामाजिक रूप से जागरूक था। वह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध थे। एमजीएम यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने बताया कि इस अनुभवी अभिनेता ने आत्महत्या करने वाले लगभग 500 किसानों की पत्नियों को ‘आरोग्य कार्ड’ देने का विचार रखा था, ताकि वे छत्रपति शंभाजी नगर के महात्मा गांधी अस्पताल में मुफ्त इलाज करा सकें।
नाना पाटेकर
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सूखाग्रस्त इलाकों में किया काम
जब महाराष्ट्र में सूखा, पानी की कमी और किसानों की आत्महत्या के मामले बढ़े, तो पाटेकर और मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे ने 2015 में 'नाम फाउंडेशन' शुरू किया। इसे महाराष्ट्र में फैले सूखे, किसानों के बढ़ते संकट और ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्याओं को लेकर चिंता के कारण शुरू किया गया था। इस संस्था का मकसद किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी शिक्षा देना, जल संरक्षण पर काम करना, जलाशयों और नहरों को फिर से जीवित करना है। पाटेकर के लिए, यह सिर्फ किसी सेलिब्रिटी का सोशल कैंपेन नहीं था। उन्होंने बताया कि एक किसान की आत्महत्या के बाद उसके परिवार की तकलीफों के बारे में टीवी पर एक रिपोर्ट देखकर उन्हें बहुत गहरा असर हुआ था।