ट्रेलर शुरू होता है ऑपरेशन थिएटर जैसी दिखने वाली अंधेरी सी जगह में जहां जैकलीन फर्नांडीज कुछ बड़बड़ा रही हैं और फिल्म से डेब्यू कर रहीं आमिर खान की भतीजी जैन मैरी चिल्ला रही हैं। फिर ट्रेलर ले जाता है वहां जहां खुदाई हो रही है। कुछ लाशें निकल रही हैं। मनोज बाजपेयी की जमानत नामंजूर होती है। उन पर सीरियल किलर होने का इल्जाम है। उनकी मिसेज को सुझाया ये जाता है कि अगर ये स्थापित कर दिया जाए कि सीरियल किलर अब भी बाहर है तो मामला बन सकता है। बस, सावित्री अपने सत्यवान को बचाने निकल पड़ी है। इस सफर में वह क्या कुछ करती है ये 1 मई को सामने आएगा।
ट्रेलर के लिहाज से देखें तो शिरीष ने काम अच्छा किया है। एडीटर वह पहले से नंबर वन रहे हैं। फिल्म लोगों को पसंद आई तो डायरेक्टर वाला काम भी उनका फिर से चल निकलेगा। जैकलीन को ऐसी एक फिल्म की अरसे से दरकार रही है। उन पर लगा नॉन एक्टर का ठप्पा हटाने का काम इस फिल्म के ट्रेलर ने तो कर दिया है, बाकी पिक्चर में पता चलेगा। मनोज बाजपेयी का चेहरा जब भी स्क्रीन पर आता है, कहानी का कोई नया सिरा हवा में उछाल जाता है। भावों की अदायगी में इस कलाकार का तोड़ नहीं है, उम्मीद की जानी चाहिए कि फिल्म भी ऐसी ही बेजोड़ हो।