राइट विंग संगठन के कुछ सदस्यों ने एनएफएआई यानी नेशनल फिल्म अर्काइव ऑफ इंडिया में घुसकर एक डाॅक्युड्रामा की स्क्रीनिंग का विरोध किया और इसे रोकने की मांग की। पुणे स्थित एनएफएआई में एक डाॅक्युड्रामा की स्क्रीनिंग का इन्होंने इसलिए विरोध किया क्योंकि इनके मुताबिक इसमें इंडियन आर्मी की तस्वीर को गलत तरह से पेश किया जा रहा था, जो इन्हें नामंजूर था। इसी वजह से इन्होंने इस स्क्रीनिंग को रोकने की पुरजोर कोशिश की।
स्क्रीनिंग रोकने की मांग की
यह घटना तब हुई जब डाॅक्युड्रामा ‘आई एम नाॅट द रिवर झेलम’ दिखाई जा रही थी। दरअसल, यहां ‘ए फेस्टिवल ऑफ कंटेम्प्रेरी इंडियन फिल्मस’ का आयोजन पुणे इंटरनेशनल सेंटर और द इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फिल्म क्रिटिक्स- इंडिया चैप्टर की तरफ से किया गया था। पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि विरोध करने वाले ये लोग ‘समस्त हिंदु बांधव संगठन’ से जुड़े थे। इन्होंने एनएफएआई में तेज आवाज में नारे लगाते हुए फिल्म की स्क्रीनिंग को रोकने की मांग की। इन्हें महाराष्ट्र पुलिस एक्ट, 1951 के तहत पकड़ा गया और बाद में नोटिस देकर छोड़ दिया गया।
आर्मी की गलत छवि दिखाना बर्दाश्त नहीं
इस संगठन के अध्यक्ष रवींद्र पाडवाल ने बताया, ‘जब हमें यह पता चला कि इस फिल्म के कुछ सीन्स में जम्मू-कश्मीर में तैनात आर्मी वालों की गलत तरीके से गुमराह करते हुए तस्वीर पेश की जा रही है, तो हमने तुरंत यहां पहुंचकर इसके रोकने की मांग की। हमें उन सीन्स के दिखाए जाने से सख्त ऐतराज है। हमने इसे रोकने की मांग की और साथ ही अपनी इंडियन आर्मी के सपोर्ट में आवाज उठाई।’ इस संगठन ने मांग की है इन्हें ये फिल्म दिखाई जाए और निर्देशक अपना पक्ष रखे।अध्यक्ष ने बताया कि जब ये लोग आयोजकों से इस बारे में बात ही कर रहे थे, तभी वहां पुलिस पहुंच गई और उन्हें पुलिस स्टेशन ले गई। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने फिल्म में इंडियन आर्मी की गलत छवि पेश की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
दिखाई गईं अवाॅर्ड विनिंग फिल्में
गौरतलब है कि यह फेस्टिवल 9 से 11 फरवरी तक चला। आयोजकों ने बताया कि इसमे हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, तमिल, मणिपुरी, राजस्थानी, हिंदी इत्यादि भाषाओं
में भी अवाॅर्ड प्राप्त की गई फिल्में दिखाई गईं।