फिल्म 'दिल से' में शाहरुख-मनीषा
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पहले कहानी का अंत अलग तरह से लिखा गया
मनीषा बताती हैं, 'जब फिल्म 'दिल से' की कहानी लिखी गई, तो शाहरुख के किरदार को इसमें मरना नहीं था। लेकिन आखिर में अंत को बदल दिया गया, शाहरुख का किरदार मेरे किरदार के साथ खुद को बम से उड़ा देता है। पहले जो अंत लिखा गया था, उसके हिसाब से शाहरुख का किरदार मेरे किरदार को रोकता है, लेकिन मेरा किरदार अपने लक्ष्य से हटता नहीं है। ऐसे में शाहरुख के किरदार के पास कोई विकल्प नहीं बचता और वह मेरे किरदार को बम से खुद को उड़ाने से रोकने की कोशिश नहीं करता। लेकिन आखिर में फिल्म से जुड़े लोगों को लगा कि ऐसा अंत दिखाकर शाहरुख और मेरे किरदार के बीच के प्यार को अच्छे से नहीं दिखा पाएंगे। बाद में शाहरुख का किरदार लोगों को धमाकों से बचाने के लिए मेरे किरदार के साथ मिलकर खाली जगह पर खुद को बम से उड़ा देता है। ऐसा अंत दिखाकर फिल्ममेकर्स यह साबित कर पाए कि शाहरुख के किरदार का प्यार मेरे किरदार के लिए बहुत अधिक रहा, साथ ही वह लोगों की जान बचाने में भी कामयाब रहा।
माधुरी की तारीफ की मनीषा ने
इसी इंटरव्यू में माधुरी की तारीफों के पुल भी मनीषा कोइराला ने बांधे। अपने युवा दिनों में मनीषा की तुलना माधुरी से की जाती थी। इस बात से आज वह काफी खुश हैं। वह माधुरी को एक उम्दा अभिनेत्री और इंसान मानती हैं। दोनों ने फिल्म 'लज्जा' में साथ काम किया। इस दौरान मनीषा ने जाना कि माधुरी कितनी मेहनती कलाकार हैं, इस वजह से वह उनकी कायल हो गई।
'बॉम्बे' में मणि रत्नम के साथ काम किया
मनीषा कोइराला ने 'दिल से' से पहले फिल्म 'बॉम्बे (1995)' में भी मणि रत्नम के साथ काम किया। उस फिल्म में भी उनकी खूबसूरती और अभिनय को उभारने में मणि रत्नम कामयाब रहे। यही कारण है कि बतौर अभिनेत्री आज भी मनीषा निर्देशक मणि रत्नम का बहुत सम्मान करती है। हाल ही में उन्होंने बताया कि जब यह फिल्म उन्हें ऑफर हुई थी, तो कई लोगों ने उनके मन में शक डाल दिया कि अगर यह फिल्म की तो आगे हीरोइन के रोल नहीं मिलेंगे। लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी और मणि रत्नम के साथ काम किया।