जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि। यह प्राचीन कहावत है। इसका आशय यही है कि कवि-कहानीकार अकल्पनीय की भी कल्पना कर लेते हैं। अक्सर अपने जीवन से प्रेरणा लेकर फिल्मी कहानियां लिखने वाले निर्माता-निर्देशक-लेखक महेश भट्ट ने कहा है कि इन दिनों सनसनी बनी हुई इंद्राणी मुखर्जी और शीना बोरा की खबर के प्लॉट पर वह अपनी कल्पना से पहले ही कहानी लिख चुके हैं।
भट्ट के अनुसार वह अपनी यह कहानी मई महीने में पूरी कर चुके थे और इसका शीर्षक है अब रात गुजरने वाली है। कहानी पर जल्द ही फिल्म की शूटिंग शुरू होने वाली है, जिसे धवल जयंती लाल गाडा निर्मित करेंगे।
मीडिया में आई खबरों के अनुसार मंगलवार को जैसे ही इंद्राणी और पीटर मुखर्जी के परिवार की कहानी सामने आई, महेश भट्ट चौंक गए। उन्होंने पाया कि अपनी अगली फिल्म के लिए उन्होंने जो कहानी लिखी है उसमें और इंद्राणी-शीना की कहानी में जबर्दस्त समानता है।
अपनी कल्पना शक्ति से लिखी थी ये कहानी
भट्ट के अनुसार, ‘मुझे इस वक्त पीटर के लिए बहुत दुख हो रहा है कि वह कितने दर्दनाक दौर से गुजर रहे होंगे। उनकी त्रासदी को बयान नहीं किया जा सकता। यह घटनाक्रम बहुत आश्चर्यजनक है क्योंकि अक्सर कहानियां जिंदगी के पीछे-पीछे चलती हैं, परंतु मेरे लिए यहां एक कहानी के नक्शे-कदम पर असल जिंदगी की घटनाएं घटित होती दिख रही हैं।’
उन्होंने बताया कि अब रात गुजरने वाली है कि कहानी भी अपराध और प्रेम से जुड़ी है। मां-बेटी के इर्द-गिर्द घूमती इस कहानी में खूनी खेल है। हालांकि उन्होंने विस्तार में जाने से इंकार कर दिया और कहा कि मेरी कहानी में भी किरदार मीडिया की दुनिया से हैं और उसमें ताकत-शोहरत और पैसे का खेल है। यहां भी उनके एक से ज्यादा पार्टनर हैं।
महेश भट्ट ने कहा कि यह कहानी मैंने अपनी कल्पना शक्ति से लिखी थी। मैंन कभी नहीं सोचा था कि जैसा मैंने लिखा है, वैसी कोई घटना इस तरह से सामने आ जाएगी। यह जबर्दस्त संयोग ही है कि एक काल्पनिक कहानी वास्तविक जिंदगी में अपने आपको प्रस्तुत कर रही है। इंद्राणी और शीना बोरा का सच सामने आने के बाद क्या महेश भट्ट अपनी कहानी में किसी तरह का बदलाव करेंगे? उनका कहना है, ‘बिल्कुल नहीं। मेरी कहानी पूरी हो चुकी है और शूटिंग की तैयारियां जारी है। यह फिल्म हम दिसंबर में शूट करेंगे।’