उत्तर- मुझे मानव के साथ काम करना अच्छा लगा; वह काफी सरगर्म, प्रसन्नचित और बहुत प्यारा इंसान है। इस फिल्म के साथ मेरी कई मीठी यादें जुड़ी हैं। फिल्म में मेरी भूमिका अच्छी है। सबसे अच्छी बात इस फिल्म की डबिंग बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से हुई, मैंने अभी-अभी अपनी डबिंग पूरी की है और अब मैं इसे देखने का इंतजार कर रहा हूं। मैं फिल्म में अपने प्रदर्शन से वाकई खुश हूं, मुझे पता है कि मैं खुद की प्रशंसा कर रहा हूं। अब सच है तो क्या करें !! (हा हा हा।)
प्रश्न- इस फिल्म में आप अपने चरित्र (करैक्टर) के बारे में कुछ बताएं
उत्तर- फिल्म में मैं एक पाकिस्तानी टैक्सी चालक का किरदार निभा रहा हूं। एक भारतीय जो पाकिस्तान में खो गया है और इस्लामाबाद जाने की इच्छा रखता है, जो बम विस्फोटों के कारण जल रहा है। वह टैक्सी ड्राइवर को इस्लामाबाद ले जाने के लिए कहता है, टैक्सी ड्राइवर यानि मैं (ओम पुरी) उसे मना कर देता हूं। युवा इतना हताश और परेशान है कि किसी भी तरह उसे इस्लामाबाद जाना है। यह जानते हुए वह नौजवान एक भारतीय है, टैक्सी ड्राइवर अंततः उसकी मदद करने का फैसला करता है बावजूद इसके कि आगे कितनी जोखिम उठानी पड़ सकती है। वह सफर के बीच कुछ खाने के लिए रुकते हैं, इस दौरान नौजवान उस चालक की निष्ठा पर संदेह करना शुरू कर देता है कि उसके मदद के पीछे उसकी बुरी योजना हो सकती है। आखिर में वह भारतीय युवा साथी इस टैक्सी चालक के लिए बहुत आभारी है क्योंकि वह रिश्ते के महत्व को समझकर अपनी आंखें खोलता है।
प्रश्न- फिल्म में अपने चरित्र के माध्यम से दर्शकों को कुछ संदेश देना चाहते हैं?
उत्तर- मेरा चरित्र खुद ही एक संदेश दे रहा है। मानव ने मेरे किरदार को बेहद खूबसूरत ढंग से लिखा है जो लोगों को बताता है कि घृणा समाप्त होनी चाहिए क्योंकि इसका कोई विशिष्ट कारण नहीं है। हम बलपूर्वक लड़ रहे हैं, हम सभी इंसान हैं और हम कई वर्षों से एक साथ रहे हैं।
मुगल शासकों का यहां लगभग 600 वर्षों तक शासन रहा, आजादी से पहले, हम सभी एक साथ रहे, हम ने सभी शिष्टाचार और तहज़ीब सीखी हैं। हां, कुछ मुद्दे रहे हैं लेकिन फिल्म में एक डायलॉग है जिसमे कहा गया है कि "समस्याएं कहां नहीं हैं घर पर भी समस्याएं होती हैं, हिंदू भाइयों के बीच और रिश्तेदारों में भी" ,फिल्म में एक और पंक्ति है जहां टैक्सी चालक कहता है कि, "मेरे पिता को आपके लखनऊ में दफनाया गया है।
मैं वहां जाना चाहता हूं और मेरी इच्छा है मैं उनके कब्र के सजदे पर बैठूं।" यह सच है, मैं पाकिस्तान 6 बार गया हूं, लोग मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि उनके पिता भारत के विभिन्न राज्यों में दफन किए गए हैं। विभाजन के दौरान यह एक बड़ी त्रासदी थी कि थोड़े समय के भीतर 10 लाख लोगों की मृत्यु हो गई।
जब विभाजन हुआ तो भाइयों ने सोचा कि एक भाई इस तरफ और दूसरा भाई दूसरी तरफ रहेंगे इससे कोई बदलाव नहीं आएगा क्योंकि वह कभी भी एक दूसरे के पास आ जा सकते हैं लेकिन उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि स्थिति इतनी खराब हो जाएगी। यह विभाजन संबंधों, भावनाओं और मनोभाव का विभाजन था।
मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि यह फिल्म सुचारू रूप से रिलीज हो जाए और लोग इसे देखें ताकि उन्हें इस फिल्म के माध्यम से समझ आ सके। हमें दुर्भाग्यवश लोगों को बार-बार यह याद दिलाना पड़ता है कि हमें जीना चाहिए और जीने देना चाहिए क्योंकि हमने बहुत कुछ बलिदान दिया है।
प्रश्न- नए निदेशक और नए अभिनेताओं के साथ या कह लें पूरी तरह से नई टीम के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?
उत्तर- खैर मुझे नहीं पता था कि यह एक नई टीम है, अगर मुझे इसके बारे में पता होता तो मैं यह प्रोजेक्ट नहीं लेता (हा हा हा, हंसते हुए)। मैंने कभी महसूस नहीं किया कि यह एक नई टीम है सभी लोगों ने काफी अच्छी तरह से अध्ययन किया हुआ था। ऐसे थोड़े ही, आए, कैमरा पकड़ा और चल दिए।
प्रश्न- नए फिल्म निर्माता के लिए कोई सलाह, जो मानते हैं कि इस इंडस्ट्री में आने और जीवित रहने में बहुत मुश्किलें हैं?
उत्तर- नए फिल्म निर्माताओं के लिए मैं कहूंगा कि इस इंडस्ट्री में छोटी फिल्मों के लिए अधिक कठिनाइयां हैं। आज के समय में प्रचार के नियम इस तरह से किए गए हैं कि एक छोटी बजट की फिल्म इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती, इसलिए मैं लोगों से अनुरोध करता हूं, वो इस साक्षात्कार को देखें। जब भी आप छोटी फिल्मों के बारे में कुछ पढ़ते हैं या उनके बारे में सुनते हैं, तो कृपया जाएं और देखें कि वे रिलीज की तारीख से तीन महीने पहले शोर तक नहीं कर सकते हैं, न ही उनके पास टीवी के बहुत सारे विज्ञापन होते हैं ,न ही बड़ी होर्डिंग्स।
मौजूदा रुझानों के मुताबिक बड़े सितारों वाली एक बड़ी फिल्म में, उन्हें सामूहिक रूप से 5000 - 6000 स्क्रीनों में रिलीज मिलता है। यह फिल्म बहुत सारे प्रचार प्रसार के माध्यम से बनाया जाता है, और फिल्म कम से कम 4 दिनों तक घर करके रहती है। उसके बाद यदि फिल्म अच्छी तरह से काम करती है तो यह केक पर चेरी की तरह है और अगर लोगों को फिल्म पसंद नहीं आई तो कम से कम उन 4 दिनों में यह फिल्म अपने खर्च निकालने का प्रबंधन कर लेती है। जो एक छोटी फिल्म के लिए मुश्किल है। इसलिए लोगों को यह समझाने के लिए कि यह एक अच्छी फिल्म है, एक अच्छी कहानी है, एक छोटी सी फिल्म के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।
आखिर में मैं कहूंगा, (मानव) फिल्म लश्तम पश्तम के निर्देशक को फिल्में बनाना बंद नहीं करना चाहिए। मेरा कहना यह नहीं है कि अन्य निदेशक बड़े अभिनेताओं के साथ अच्छी फिल्में नहीं बनाते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि यथार्थवादी फिल्में भी दिखाना महत्वपूर्ण है।
यह फिल्म 10 अगस्त को रिलीज़ होने वाली है। देखिये ओम पुरी जी के आखिरी साक्षात्कार का वीडियो