अंतरराष्ट्रीय ख्याति के उर्दू कहानीकार ख़ालिद जावेद 19 फरवरी से होने वाले लाहौर लिटरेचर फेस्टिवल में हिस्सा लेंगे। जहां वे शर्मिला टैगोर, महेश भट्ट और पूजा भट्ट के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। वे विख्यात लैटिन अमेरिकी रचनाकार गैब्रियल गार्सिया मार्क्वेज अपना पेपर पढ़ेंगे। ख़ालिद बरेली के रहने वाले हैं और इन दिनों जामिया मिलिया यूनीवर्सिटी में उर्दू के रीडर हैं। उन्होंने बरेली कॉलेज में कुछ समय तक दर्शनशास्त्र भी पढ़ाया है।
लाहौर लिटरेचर फेस्टिवल 2013 से हर साल आयोजित किया जाता है और इसमें दुनिया भर से साहित्यकार और विचार इकट्ठा होते हैं। भारत से अब तक इतिहासकार रोमिला थापर, अंग्रेजी लेखक विक्रम सेठ, नमिता गोखले और बाप्सी सिधवा, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह हिस्सा ले चुके हैं।
जिस तरह जेम्स ज्वायस ने डब्लिन और अल्बेयर कामू ने अल्जीरिया को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया, खालिद जावेद भी अपनी रचनाओं के जरिए बरेली की तंग गलियों बसे एक संसार और उनमें न जाने कितने अनूठे किरदारों को दुनिया के सामने लेकर आए हैं। वे उर्दू में आधुनिक शैली की कहानियां लिखने वाले सबसे बेहतरीन रचनाकारों में से एक हैं।
उनकी कहानियों का हिन्दी, अंग्रेजी और फ्रेंच के अलावा दुनिया की कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और विश्व के कई अध्ययन केंद्रों में उनकी रचनाएं पढ़ाई जाती है।
खालिद के लेखन का बड़ा हिस्सा उनके बरेली रहने के दौरान सामने आया और उसे देश-विदेश में मान्यता मिलने लगी। कहानी 'बुरे मौसम में' के लिए खालिद को कथा सम्मान मिला। इसी दौरान अश्क समारोह में उन्हें उदय प्रकाश, अनामिका तथा हिन्दी के कई जाने-माने रचनाकारों के साथ अपनी कहानी 'हिजियान' पढ़ने का मौका मिला।
अब तक उनकी दो किताबें हिन्दी में प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें पहली कहानी संग्रह बुरे मौसम में और दूसरी एक उपन्यास मौत की किताब है। उर्दू में मिलान कुंदेरा और मार्क्वेज पर उनके आलोचनात्मक काम को काफी सराहना मिल चुकी है।