कई दिग्गज सितारों के साथ किया काम
वह 1963 में फिल्म इंडस्ट्री में शामिल हुईं और बदतमीज (1966) जैसी फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं, जहां उन्होंने शम्मी कपूर की बहन, परदेसी (1970), घूंघट (1971), मेला (1971) और ये गुलिस्तान हमारा (1972) में भूमिका निभाई। उन्होंने संजीव कुमार के साथ जिगर अने अमी (1970), धरती ना छोरू (1970), गुणसुंदरी नो घर संसार (1972) और असरानी के निर्देशन में बनी अमदावद नो रिक्शावालो (1974) जैसी गुजराती फिल्में भी कीं, जो एक कल्ट फिल्म बन गई। उनकी कुछ प्रसिद्ध मराठी फिल्में हैं, जिनमें "राजा शिव छत्रपति" (1974), वराट (1975), पाहुनी (1976) और चंद्र होता साक्षीला (1978) शामिल हैं।
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एक फिल्म से घर-घर में छाईं कनन
1975 में एक छोटी सी फिल्म आई 'जय संतोषी मां', जो मामूली बजट की थी और अज्ञात कलाकारों वाली फिल्म थी। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक बन गई। इसमें मुख्य भूमिका निभाकर कनन घर-घर में मशहूर हो गईं और उन्हें इंडस्ट्री में भी खास पहचान मिली। हालांकि, इसके बावजूद उनका करियर कुछ खास नहीं चमक पाया। दरअसल, कनन को उम्मीद थी कि 'जय संतोषी मां' की बड़ी सफलता के बाद उन्हें अच्छी भूमिकाएं मिलेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और वह चरित्र भूमिकाओं और पौराणिक फिल्मों में काम करती रहीं। उनकी कुछ बेहतरीन फिल्मों में माया मच्छिन्द्रा (1975), बिदाई (1974), राम भरोसे (1977), जय द्वारकाधीश (1977), जय गणेश (1978), मान अपमान (1979), घर की लाज (1979), संत ज्ञानेश्वर (1983), भगवान दादा (1986), जाग उठा इंसान (1984), तूफान (1989), सनम आप की खातिर (1992) और जीवन दाता (1991) जैसी फिल्में शामिल हैं। कनन कौशल 1990 के दशक की शुरुआत तक इंडस्ट्री में सक्रिय रहीं, इसके बाद उन्होंने सिनेमा से दूरी बना ली।