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Kanan Kaushal Birthday: 'जय संतोषी मां' से घर-घर में छाईं कनन कौशल, ब्लॉकबस्टर फिल्म देने पर भी फीका रहा करियर

Fri, 21 Mar 2025 09:10 AM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Kanan Kaushal: 'जय संतोषी मां' फिल्म से घर-घर में मशहूर हुईं अभिनेत्री कनन कौशल का आज 86वां जन्मदिन है। चलिए इस खास मौके पर उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं...
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कनन कौशल - फोटो : एक्स
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विस्तार
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अभिनेत्री कनन कौशल आज 21 मार्च को अपना 86वां जन्मदिन मना रही हैं। कनन मुख्य रूप से मराठी सिनेमा में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने 1975 की बॉलीवुड हिट "जय संतोषी मां" में सत्यवती व्यास की भूमिका के लिए पहचान हासिल की। अभिनेत्री का असली नाम इंदुमती पैगनकर है, जिन्हें बाद में कनन कौशल के नाम से जाना गया। चलिए आज अभिनेत्री के जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें...

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कई भाषा की फिल्मों में नजर आईं कनन
कनन कौशल का जन्म 21 मार्च, 1939 को बड़ौदा में इंदुमती शेठ के रूप में हुआ था। "गोमांतक मराठा" समुदाय से आने वाली कनन ने अपना करियर मंच से शुरू किया और फिल्मों में आने से पहले थिएटर में बड़े पैमाने पर काम किया। कनन कई मराठी, गुजराती, भोजपुरी और हिंदी-मराठी फिल्मों में दिखाई देती थीं। अब उन्होंने सिनेमा से दूरी बना ली है।
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कई दिग्गज सितारों के साथ किया काम
वह 1963 में फिल्म इंडस्ट्री में शामिल हुईं और बदतमीज (1966) जैसी फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं, जहां उन्होंने शम्मी कपूर की बहन, परदेसी (1970), घूंघट (1971), मेला (1971) और ये गुलिस्तान हमारा (1972) में भूमिका निभाई। उन्होंने संजीव कुमार के साथ जिगर अने अमी (1970), धरती ना छोरू (1970), गुणसुंदरी नो घर संसार (1972) और असरानी के निर्देशन में बनी अमदावद नो रिक्शावालो (1974) जैसी गुजराती फिल्में भी कीं, जो एक कल्ट फिल्म बन गई। उनकी कुछ प्रसिद्ध मराठी फिल्में हैं, जिनमें "राजा शिव छत्रपति" (1974), वराट (1975), पाहुनी (1976) और चंद्र होता साक्षीला (1978) शामिल हैं।
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एक फिल्म से घर-घर में छाईं कनन
1975 में एक छोटी सी फिल्म आई 'जय संतोषी मां', जो मामूली बजट की थी और अज्ञात कलाकारों वाली फिल्म थी। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक बन गई। इसमें मुख्य भूमिका निभाकर कनन घर-घर में मशहूर हो गईं और उन्हें इंडस्ट्री में भी खास पहचान मिली। हालांकि, इसके बावजूद उनका करियर कुछ खास नहीं चमक पाया। दरअसल, कनन को उम्मीद थी कि 'जय संतोषी मां' की बड़ी सफलता के बाद उन्हें अच्छी भूमिकाएं मिलेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और वह चरित्र भूमिकाओं और पौराणिक फिल्मों में काम करती रहीं। उनकी कुछ बेहतरीन फिल्मों में माया मच्छिन्द्रा (1975), बिदाई (1974), राम भरोसे (1977), जय द्वारकाधीश (1977), जय गणेश (1978), मान अपमान (1979), घर की लाज (1979), संत ज्ञानेश्वर (1983), भगवान दादा (1986), जाग उठा इंसान (1984), तूफान (1989), सनम आप की खातिर (1992) और जीवन दाता (1991) जैसी फिल्में शामिल हैं। कनन कौशल 1990 के दशक की शुरुआत तक इंडस्ट्री में सक्रिय रहीं, इसके बाद उन्होंने सिनेमा से दूरी बना ली।
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