बॉलीवुड मे अपने शब्दों से गानों और कहानियों में जान फूंकने वाले जावेद अख्तर 17 जनवरी को अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। मध्य प्रदेश में जन्में जावेद अख्तर बॉलीवुड के गीतकार, लेखक और कवि भी हैं। उनके पिता निसार अख्तर मशहूर लेखक थे और मां साफिया अख्तर एक उर्दू टीचर थीं । मां के निधन के बाद वो अपनी खाला यानी मौसी के पास अलीगढ़ चले गए थे और वहीं से उन्होंने पढ़ाई की। बॉलीवुड में उनकी कला के लिए उन्हें साहित्य अकादमी, पद्मश्री, पद्म भूषण जैसे अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इतना ही नहीं उनके गीत और लेख के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
जावेद अख्तर और सलीम की जोड़ी पर्दे पर खूब कमाल दिखाती थी। कई फिल्मों में डायलॉग लिखने के बाद जावेद ने सलीम से हाथ मिला लिया था और दोनों ने मिलकर करीब 24 फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी थीं जिसमें सिर्फ 4 कहानियां ही फ्लॉप हुई थीं। उनकी साथ में लिखी 20 कहानियों ने पर्दे पर तहलका मचा दिया था। पहली बार दोनों की जोड़ी 1971 में फिल्म 'अंदाज' और 'अधिकार' के दौरान बनी थी। इसके बाद दोनों की जोड़ी काफी समय तक सफल रही। हालांकि 1982 में जावेद और सलीम कुछ निजी कारणों के चलते एक दूसरे से अलग हो गए।
'शोले' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों को लिखने के अलावा जावदे अख्तर के पास कविता का भंडार हैं जिन्हें कभी पर्दे पर इस्तेमाल ही नहीं किया गया। उनकी लिखी कविताएं अगर पढ़ ली जाएं तो जिंदगी की कहानी आंखों के सामने आ जाएंगी। अपनी कलम से जादू चलाने वाले जावेद अख्तर की कुछ ऐसी ही कविताओं के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जो जिंदगी की सच्चाई शब्दों में बयान करती है।
जावेद अख्तर की अनसुनी कविताएं
1) वो मुफलिसों से कहता था कि दिन बदल भी सकते हैं....
वो जबिरों से कहता था तुम्हारे सर पर सोने का जो ताज है कभी पिघल भी सकता है
वो बंदिशो से कहता था मैं तुमको तोड़ सकता हूं....
2) गलत बातों को खामोशी से सुनना, हामी भर लेना, बहुत हैं फायदे इसमें, मगर अच्छा नहीं लगता
3) मुझको यकीन है सच कहती थी जो भी अम्मी कहती थी
4) जीना मुश्किल है कि आसान जरा देख तो लो, लोग कहते हैं, लोग लगते हैं परेशान जरा देख तो लो
ये नया शहर तो है खूब बसाया तुमने, क्या पुराना हुआ वीरान जरा देख तो लो
तुम ये कहते हो कि मैं गैर हूं फिर भी शायद निकल आए कोई पहचान जरा देख तो लो