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50 Years Of Ishk Ishk Ishk: क्यों फ्लॉप हुई देव आनंद की 'इश्क इश्क इश्क'? 50वीं सालगिरह पर जानते हैं कारण

Fri, 08 Nov 2024 02:14 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

देव आनंद की फिल्म 'इश्क इश्क इश्क' की आज 50वीं सालगिरह है। यह फिल्म 8 नवंबर 1974 को रिलीज हुई। इस फिल्म का निर्देशन देवआनंद ने किया, वह भी उस समय जब उनके सितारे शीर्ष पर रहे। मगर, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही। आइए जानते हैं कारण
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इश्क इश्क इश्क - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देव आनंद की फिल्म हो। शबाना आजमी, जीनत अमान और प्रेम नाथ जैसे सितारे। आर डी बर्मन का संगीत हो, तिस पर फिल्म बनाने में पैसा भी पानी की तरह बहाया गया हो। तो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्या करेगी? शायद जवाब हो कि कमाल करेगी। लेकिन, 'इश्क इश्क इश्क' में ये सभी बातें होते हुए भी बॉक्स ऑफिस पर डिजास्टर साबित हुई। देव आनंद की इस फिल्म की रिलीज को आज 50 साल हो गए हैं। जानते हैं फिल्म के फ्लॉप होने के कारण

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बेदम सी है कहानी
इस फिल्म को पहाड़ों की खूबसूरत लोकेशन पर फिल्माया गया। खूबसूरत नजारे दिखाई देते हैं। लेकिन, फिल्म की कहानी ऐसी है कि खूबसूरत दृश्य ध्यान ही नहीं खींच पाते। कहानी किसी फिल्म की आत्मा होती है। लेकिन, यह फिल्म इसी स्तर पर चरमराई हुई सी है। फिल्म में कुछ भी वास्तविक नहीं है। कहने को लव स्टोरी फिल्म है, लेकिन एक भी दृश्य ऐसा नहीं है, जो यादगार हो। फिल्म में देव आनंद दो-दो अदाकारओं के प्यार में पड़े, लेकिन एक के साथ भी उनके रोमांटिक सीन खास नहीं रहे। इस फिल्म का निर्देशन खुद देव आनंद ने किया था और प्रोड्यूस भी उन्होंने किया।

लव स्टोरी फिल्म से रोमांस गायब
फिल्म की कहानी धुन (देव आनंद) पर बनी है, जो फिल्म में संगीत के शिक्षक बने हैं। स्कूल में पढ़ाने के दौरान उनकी आंखे पम्मी (शबाना आजमी) से चार होती हैं। इश्क की आग दोनों तरफ से लगी होती है, सिर्फ परदे पर ही नजर नहीं आती। दोनों रोज मुलाकातें करते हैं, लेकिन एक ही तरीका। वही, पेड़ के नीचे एक नियत स्थान पर। इसके अलावा इनके बीच प्यार-मोहब्बत जैसा कुछ नहीं। बात सीधे शादी तक पहुंचती है। दो दिल मिल नहीं पाते हैं। इनके बीच विरह का गीत तो दूर, एक ढंग का रोमांटिक सीन भी नहीं देखने को मिला।

शबाना आजमी का नहीं दिखा जादू
अधूरी मोहब्बत में टूटा धुन अपनी शिक्षक की नौकरी छोड़ पहाड़ों का रुख करता है। कहीं भी इमोशंस नहीं हैं। धुन के स्कूल की नौकरी छोड़ जाने वाले विदाई के पल को सिर्फ एक गाने में समेट दिया। न स्कूल पर फर्क पड़ा न कोई रोकने वाला रहा। शबाना आजमी कुछ पलों में दिखाई दीं, उसके बाद गायब। कहा जाता है कि यह उनकी पहली कमर्शियल फिल्म है। लेकिन, फिल्म में उनका खास रोल नहीं है। पूरी फिल्म की कहानी इतनी सपाट है कि दृश्य बस साथ-साथ चलते जा रहे हों ऐसा लगता है। कहीं भी ठहराव नहीं है। 

टूटे दिल के साथ मोहब्बत 2.0
टूटे दिल को लेकर पहाड़ों पर पहुंचे धुन (देव आनंद) का दिल वहां पहुंचते ही एक लड़की पूजा पहार (जीनत अमान) पर आ गया। न उसका अतीत पूछा न अपना बताया, बस संगीत नाइट में शामिल हो गए। 'मुझको अगर इजाजत हो' पर डांस करने लगे और पूजा के प्यार में पड़ गए। फिर कुछ ऐसे ही हिसाब-किताब से फिल्म बढ़ती रही। प्रेम नाथ फिल्म में जीनत अमान के पिता की भूमिका में हैं, जो छह बेटियों के पिता हैं और बेटियों के नाम से होटल चलाते हैं। इसी होटल में मेहमान बनकर देव आनंद ठहरते हैं। यहां एक और प्रेम कहानी शुरू होती है। प्रेमनाथ फिल्म में शराबी के रोल में हैं। कहा जाता है कि फिल्म की शूटिंग के दौरान शराबी का रोल करते हुए उन्होंने कैमरा पर ही बोतल दे मारी थी। इसके बाद देव आनंद ने उन्हें कभी नवकेतन फिल्म्स में काम नहीं करने दिया। हालांकि, फिल्म में प्रेमनाथ एक बार भी शराबी का रोल ढंग से करते तो दिखे नहीं हैं।
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नाटकीय मोड़ के साथ हैप्पी एंडिंग
फिल्म का अंत तो ऐसा है कि अगर उस समय में सोशल मीडिया रहा होता तो भर-भरकर मीम्स परोसे गए होते और ट्रोलिंग होती अलग। एक नाटकीय मोड़ आता है। दूसरी बार में धुन जिस लड़की के प्यार में पड़ता है और शादी करने के करीब पहुंचता है वह उसकी भांजी निकल आती है। मामा-भांजी का रिश्ता क्या सोचकर डाला गया पता नहीं। हालांकि, यह कंफ्यूजन बाद में दूर होता है और एक क्लाइमैक्स के साथ फिल्म की हैप्पी एंडिंग होती है। इस फिल्म में कोई डायलॉग ऐसा नहीं, जो याद रह जाए। 
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कम नहीं हुए देव साहब के हौसले
यह फिल्म फ्लॉप साबित हुई थी। शेखर कपूर ने इस फिल्म से डेब्यू किया था। इससे पहले वे लंदन में बतौर सीए काम कर रहे थे। लेकिन, देव आनंद के कहने पर वे इस फिल्म में काम करने आए। एक इंटरव्यू में उन्होंने जिक्र किया, 'देव आनंद ने अपनी सारी दौलत इस फिल्म में लगा दी। फिल्म की रिलीज की शाम वो डिस्ट्रीब्यूटर्स से बात कर रहे थे। हमेशा की तरह उत्साहित और खुश। लेकिन, दो घंटे बाद उनका चेहरा उतर गया और आवाज धीमी हो गई। मालूम चल गया था कि फिल्म फ्लॉप है। कॉल आने बंद हो गए। एक सन्नाटा था। लेकिन, कुछ ही देर बाद वे वापस कमरे बाहर आए और चिल्लाए, बोले- ये मेरी अगली फिल्म की स्क्रिप्ट है। देखकर हैरानी हुई की जिस इंसान ने अभी-अभी अपना सबकुछ खो दिया। उसके पास कितना जज्बा है। वे ऐसे ही थे'।
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