आपको 'रांझणा' फिल्म में सोनम कपूर की चुप-चुप रहने वाली सहेली तो याद ही होगी। रश्मि नाम है उसका। वह सोनम कपूर के साथ दिल्ली से बनारस आयी हुई होती है। तो सोनम कपूर की वह सहेली जो बाद में अभय देओल की बहन भी निकलती है वे दरअसल शिल्पी मारवाह हैं।
शिल्पी थिएटर की मंझी हुई अदाकारा हैं। अरविंद गौड़ के निर्देशन में चल रहे अस्मिता थिएटर ग्रुप से दर्जनों नाटकों में लीड ऐक्टिंग कर चुकी शिल्पी ने 'रांझणा' फिल्म से अपना बॉलीवुड डेव्यू किया है।
अपने फिल्मी अनुभव शेयर करते हुए शिल्पी कहती हैं कि वह थिएटर से एक अलग दुनिया है। चूंकि मैं थिएटर की कलाकार थी तो मेरे लिए अभिनय करना आसान ही लगा। कोई भी ऐसा सीन नहीं थी जिसके लिए मुझे दोबारा टेक देना पड़ा है।
कई बार जब मुझे खुद संतुष्टि न होती तो मैं ही दोबारा करने के लिए कहती। यह बडा अच्छा लगता कि आप अपना एक्ट किया हुआ सीन तुरंत फिर से देख सकें और अगले ही पल कमियों को सुधारकर फिर से उसे रीशूट कर सकें।
साथी कलाकार बढ़ाते उत्साह
शिल्पी कहती हैं कि चर्चित और बड़े कलाकारों के साथ आपकी पहली फिल्म आपको नर्वस कर देती हैं। लेकिन साथी कलाकारों ने यह कभी महसूस हो होने नहीं दिया कि यह मेरी पहली फिल्म है। अभय देओल हों या फिर धनुष सभी न सिर्फ फिल्म के बारे में बात करते बल्कि मुझमें नर्वसनेस कम करने के लिए इधर-उधर की बातें भी करते। फिर इस फिल्म के निर्देशक आनंद एल राय भी हर कलाकार को बराबर की तवज्जो देते।
सीखने की ललक ही रही
शिल्पी कहती हैं कि मैने भले ही दर्जनों प्ले कर लिए हों लेकिन मेरा फोकस सीखने पर ही रहा है। शूटिंग के हर दिन मैने कुछ न कुछ सीखा। थिएटर का माध्यम फिल्म माध्यम से अलग है मैने यह कोशिश की इन दोनों माध्यमों की तुलना करूं और यह देखूं कि कहां इनमें समानता है और कहां असमानता।
थिएटर ही फिलहाल प्राथमिकता
शिल्पी कहती हैं कि भविष्य में मैं फिल्में करती रहूंगी। लेकिन फिलहाल मेरी प्राथमिकता थिएटर ही है। जब मौका मिलेगा तो तब फिल्मों में निकल जाऊंगी। जो थिएटर में सीखा है उस हुनर को फिल्मों में प्रयोग करूंगी।