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चोर हूं लेकिन लोगों से चीटिंग नहीं कीः दीपक डोबरियाल

Fri, 02 Aug 2013 07:52 AM IST
रवि बुले
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अब आप एक्टर दीपक डोबरियाल को उनके वास्तविक रूप में देख सकते हैं। शुक्रवार को उनकी फिल्म 'चोर चोर सुपर चोर' रिलीज हो रही है। इस फिल्म में पहली बार वे टिकट खिड़की के सितारों की भीड़ से अलग, सोलो हीरो के रूप में बॉक्स पर जोर-आजमाइश करेंगे।
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'ओमकारा' के रज्जू से उन्होंने जो पहचान बनाई, उसके बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 'दिल्ली-6' का ममदू और 'तनु वेड्स मनु' के पप्पीजी के रूप में भी दर्शकों ने उन्हें प्यार दिया। 'नॉट अ लव स्टोरी' में रॉबिन फर्नांडिस के किरदार के बाद वह 'दबंग 2' में गेंदा के रूप में दिखे थे। लेकिन इन फिल्मों में कहीं न कहीं गेट-अप था। जो उन्हें रोल में ढालने का काम कर रहा था। लेकिन 'चोर चोर सुपरचोर' में ऐसा नहीं है।

दीपक कहते हैं कि दर्शकों के सामने अब मैं असली रूप में हूं। थियेटर की दुनिया से फिल्मों में पैर जमाने वाले दीपक चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। यही कारण है वह फार्मूला और टाइप्ड फिल्मों से बाहर काम कर रहे हैं। किरादारों को लेकर उनमें पैशन है और वे सिर्फ गेट-अप बना कर पर्दे दिखने को तैयार नहीं हैं।
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दीपक के अनुसार, किसी हिट फिल्म का हिस्सा होने के बाद काम करना आसान होता है। जो रोल आपके सामने आ रहे हैं, उन्हें हां कहते रहिए। मैं ऐसा नहीं चाहता। मैंने पिछले कुछ समय में कई बड़े निर्देशकों और प्रोडक्शन हाउसों को उनकी फिल्मों के लिए इंकार किया और उनकी नाराजगी मोल ली है। बंधी-बंधाई इमेज में काम करते रहने में मेरा भरोसा नहीं है।

चोर के सुधरने की कहानी है यह फिल्म

दीपक पूरे विश्वास से कहते हैं कि मैंने उन्हीं फिल्मों में काम किया, जिनमें मेरा विश्वास था। जिनमें मेरे रोल में कुछ ऐसा था जो दर्शकों को आकर्षित करे। मैंने कभी पब्लिक के साथ चीटिंग नहीं की। लेकिन फिल्म 'चोर चोर सुपरचोर' में वह किसके साथ चीटिंग कर रहे हैं?

वह कहते हैं, यहां मैं चोरों के एक गैंग का सदस्य जरूर हूं लेकिन बाद में सुधर जाता हूं। खास बात यह है कि सुधरने के बाद कहानी में ट्विस्ट आता है और मुझे फिर कुछ चालाकी करनी पड़ती है। यूं समझिए की सीधी अंगुली से घी नहीं निकलता तो अंगुली टेढ़ी करनी पड़ती है।

फिल्म में निर्देशक (के.राजेश) और उनकी टीम नई है। दीपक कहते हैं कि यह एक फन फिल्म है। इसकी टीम के साथ काम करना भी फन था। हमने कई एक्सपेरीमेंट फिल्म में किए और राजेश ने मुझे ऐक्टिंग में काफी आजादी दी। क्या हर निर्देशक के साथ ऐक्टर को यह आजादी मिलती है?

दीपक के अनुसार उन्हें किसी निर्देशक ने किरदार को अपने ढंग से निभाने से नहीं रोका क्योंकि वे डूब कर काम करते हैं और हर निर्देशक अपने ऐक्टर से ऐसी ही प्रतिबद्धता चाहता है। वह हंस कर कहते हैं कि कई बार तो मैं निर्देशक के हाथ से निकल जाता हूं।

वास्तव में यही प्रतिबद्धता है जो दीपक को एक बार में एक साथ कई फिल्में करने से रोकती है। वह एक बार में केवल एक फिल्म करते हैं। फिर दो-तीन महीने का ब्रेक लेकर खुद को किरदार से बाहर लाते हैं।

'चोर चोर सुपर चोर' के बाद दीपक की अगली फिल्म होगी 'डेमोक्रेसी प्राइवेट लिमिटेड' । यह आज की राजनीति पर व्यंग्य है। वह 'तनु वेड्स मनु' के सीक्वल में भी वह दिखेंगे। लेकिन पप्पीजी के रोल से कुछ अलग।
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