उम्र के इस मोड़ पर पीछे मुड़ कर देखते हैं तो क्या पाते हैं?
क्या देखें पीछे मुड़ कर! ज्यादातर मैं पीछे मुड़ कर नहीं देखता। आगे ही देखता हूं कि क्या होने वाला है। पीछे की कुछ यादें हैं, जैसा समान्यतः सभी के साथ होता है। अगर पीछे मुड़ कर देखना चाहूंगा तो वे दिन देखूंगा जो मां और बाबूजी के साथ बिताए हैं।
अब आराध्या (पोती) भी आपके जीवन में है।
हां, उनके साथ खुशी मिलती है। नाती-पोती के साथ जीवन का अपना सुख है। लेकिन काम इतना है कि कई बार उनके साथ वक्त बिताना भी दुर्लभ हो जाता है। कल ही मैं लौट कर आया तो चार-पांच दिन के बाद आराध्या से मिला था।
क्या आज भी आप अपने आप को एंग्री यंग मैन मानते हैं?
अरे नहीं, ये सब खिताब मीडिया के लोगों ने दिया है।
अमिताभ बच्चन क्या अपनी इमेज को लेकर सजग रहते हैं?
इमेज क्या होती है? मैं इसे नहीं मानता। काम है, करना है। जितना उसको करना है जीना है, उतना करते हैं जीते हैं। अगर आप उसे इमेज समझते हैं तो आप जानिए।
आप पर कई किताबें लिखी जा चुकी हैं। क्या कभी आत्मकथा लिखेंगे?
क्या लिखेंगे उसमें! ऐसा कुछ खास बताने को नहीं है हमारे पास।