इकबाल हुसैन था असली नाम
हसरत जयपुरी का जन्म 15 अप्रैल 1922 को राजस्थान के जयपुर में हुआ था। उनका असली नाम इकबाल हुसैन था, लेकिन शायरी की दुनिया में उन्होंने 'हसरत जयपुरी' के नाम को अपनी पहचान बनाया। उनके पिता, नाजिम हुसैन सेना में कार्यरत थे, जबकि उनकी मां फिरदौसी बेगम एक गृहिणी थीं, जिन्हें शायरी से गहरा लगाव था। मां की यह रुचि हसरत को विरासत में मिली। आगे चलकर इसी चीज ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी।
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20 साल की उम्र में लिखनी शुरू कीं कविताएं
हसरत ने प्रारंभिक शिक्षा जयपुर में ही प्राप्त की। उन्हें असली तालीम उनके नाना फिदा हुसैन 'फिदा' से मिली, जो एक मशहूर शायर थे। नाना से हसरत ने उर्दू और फारसी की बारीकियां सीखीं, जिसने उनकी शायरी को गहराई दी। बीस साल की उम्र तक हसरत ने कविताएं लिखना शुरू कर दिया था। उनकी रचनाओं में प्रेम और जिंदगी के प्रति एक अनूठा दृष्टिकोण झलकता था।
प्रेमिका के लिए लिखी लाइन हुई खूब मशहूर
हसरत जयपुरी का निजी जीवन भी उनकी शायरी की तरह रंगों से भरा और भावनात्मक था। बीस साल की उम्र में उन्हें अपने पड़ोस की एक हिंदू लड़की, राधा से प्रेम हो गया था। इस प्रेम ने उनकी लेखनी को और निखारा। हसरत ने एक साक्षात्कार में कहा था, "प्रेम का कोई धर्म नहीं होता।" उन्होंने राधा के लिए एक कविता लिखी थी, "ये मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर, के तुम नाराज़ न होना," जो बाद में फिल्म संगम (1964) का हिस्सा बनी और देशभर में मशहूर हुई। हसरत जयपुरी की निजी जिंदगी की बात करें तो शादी के बाद उनकी पत्नी ने एक बेटे का जन्म दिया। बेटे के जन्म पर उन्होंने जो पंक्तियां लिखीं वो थीं, "तेरी प्यारी-प्यारी सूरत को किसी की नजर न लगे," यह लाइनें भी फिल्म ससुराल (1961) का हिस्सा बनीं।
राज कपूर के साथ खूब जमी जोड़ी
एक मुशायरे में उनकी मुलाकात अभिनेता पृथ्वीराज कपूर से हुई, जो उनकी शायरी से बेहद प्रभावित हुए। पृथ्वीराज ने अपने बेटे राज कपूर, को हसरत से मिलने की सलाह दी। उस समय राज कपूर अपनी फिल्म बरसात (1949) की तैयारी कर रहे थे। हसरत ने इस फिल्म के लिए अपना पहला गीत 'जिया बेकरार है, छाई बहार है' लिखा, जिसे शंकर-जयकिशन ने संगीतबद्ध किया। यह गीत सुपरहिट हुआ, और इसके साथ ही हसरत जयपुरी का नाम हिंदी सिनेमा में गूंजने लगा।
इन फिल्मों के लिए लिखे सुपरहिट गाने
बरसात की सफलता के बाद हसरत जयपुरी, राज कपूर, और शंकर-जयकिशन की तिकड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई कालजयी गीत दिए। हसरत ने राज कपूर की फिल्मों जैसे आवारा, श्री 420, जिस देश में गंगा बहती है, संगम, और मेरा नाम जोकर के लिए यादगार गीत लिखे। 1966 और 1972 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला। उनकी खासियत थी कि वह साधारण शब्दों में गहरी बातें कह जाते थे। उनकी लेखनी में प्रेम, देशभक्ति, और सामाजिक मुद्दों का सुंदर समावेश होता था।