संस्कृति मंत्रालय ने बुधवार को प्रसिद्ध गायक मुकेश की 100वीं जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। आकाशवाणी रंग भवन, ऑल इंडिया रेडियो, नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। मंत्री शेखावत ने डाक टिकट के विमोचन पर मुकेश के असाधारण करियर और उनकी अविस्मरणीय आवाज के लिए गहरा सम्मान व्यक्त किया। साथ ही उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुकेश की 100वीं जयंती का प्रतीक है डाक टिकट
स्मारक डाक टिकट मुकेश की 100वीं जयंती का प्रतीक है। शेखावत ने कहा, 'स्मारक डाक टिकट का अनावरण समारोह मुकेश के उल्लेखनीय करियर और अविस्मरणीय आवाज के प्रति हमारे गहरे सम्मान और प्रशंसा का प्रतीक है। यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो न केवल उनकी शताब्दी का जश्न मना रहा है बल्कि संगीत उद्योग पर उनके गहरे प्रभाव को भी अमर बना रहा है।'
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मुकेश को अर्पित की गई संगीतमय श्रद्धांजलि
शाम एक मनमोहक संगीतमय श्रद्धांजलि से भरी रही जिसमें मुकेश के बेटे नितिन मुकेश ने प्रस्तुति दी। धुनें मेहमानों के बीच गूंजती रहीं, पुरानी यादें ताजा करती गईं और संगीत के उस सुनहरे युग का जश्न मनाती रहीं, जिसे मुकेश ने इतनी खूबसूरती से पेश किया। इसमें कहा गया है कि मुकेश के गाने महज नोट्स नहीं थे, वे धुनों में बुनी गई कहानियां थीं जो सीधे मानवीय अनुभव से बात करती थीं।
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मुकेश का सदाबहार काम
मुकेश ने अपने जमाने के सभी लीड स्टार्स के लिए गाने गाए, लेकिन सबसे ज्यादा उन्होंने शोमैन राज कपूर के लिए गाए। इनमें 'दोस्त-दोस्त ना रहा', 'आवारा हूं' और 'मेरा जूता है जापानी' सहित कई शानदार गाने शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुकेश ने अपने सिंगिंग करियर में 1300 से भी ज्यादा गाने गाए थे। मुकेश कभी राज कपूर की आवाज माने जाते थे। मुकेश ने हिंदी फिल्म में जो पहला गाना गाया, वह था 'दिल जलता है तो जलने दे' जिसमें अभिनय मोतीलाल ने किया था। मुकेश को 1959 में 'अनाड़ी' फिल्म के 'सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी' गाने के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायन का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। मुकेश की मृत्यु 27 अगस्त 1976 को डेट्रॉयट, मिशिगन, अमेरिका में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी, जहां वे एक संगीत कार्यक्रम में भाग लेने गए थे।