'गोरी तेरे प्यार में' के साथ हिंदी फिल्मों में गांव लंबे समय के बाद नजर आया। जानिए फिल्मों और गांव का कनेक्शन।
चर्चित फिल्म `गोरी तेरे प्यार में' से एक बार फिर सिनेमा से दूर होते गांवों की बड़े परदे पर वापसी हुई है। करीना एक बार फिर गांव की लड़की के किरदार में नजर आयी हैं। कुछ समय से बड़े परदे पर गांवों ने अपनी धाक जमाई हुई है।
इससे पहले `रमैया वस्तावैया', `दबंग', `सन ऑफ सरदार' जैसी फिल्मों में भी ठेठ गांव का ही बैकड्रॉप था। कहने की जरूरत नहीं कि ये फिल्में कितनी पसंद की गईं। इसी कड़ी में अगली मानी जा सकती है `गोरी तेरे प्यार में'। इस फिल्म मेंे सिनेमा से मिटते गांव को नए अंदाज में लेकर आए हैं करण जौहर। फिल्म को डायरेक्ट किया है पुनीत मल्होत्रा ने।
फिल्म की कहानी कुछ-कुछ वैसी ही लगती है जैसे सलमान खान और काजोल अभिनीत `जब प्यार किया तो डरना क्या’ थी। उस फिल्म की कहानी में भी सलमान ने शहर के ऐसे युवक का किरदार निभाया है जो परिवार से कटे हुए रहते हैं और अपनी प्रेमिका को पाने के लिए वह उसके गांव जाते हैं।
करीना की तरह काजोल भी उस फिल्म में पढ़ी-लिखी गांव की गोरी बनी थीं। फिल्म शहर और गांव की कहानी का मिक्सअप है। इससे पहले `दबंग’, `रमैया वस्तावैया’ और `सन ऑफ सरदार’ में भी गावों का समाज और लाइफस्टाइल दिखाया गया था।
करीना `जब वी मेट’ में भी इसी अंदाज में देखने को मिली थीं। अब करीना एक बार फिर उसी फ्लेवर में दिखी हैं। अगर ध्यान दें, तो साई-फाई के इस दौर में भी गांवों के बैकड्रॉप वाली ऐसी फिल्मों का अपना महत्व है।
हाल ही में आई `भाग मिल्खा भाग’ इसका ज्वलंत उदाहरण है। इस फिल्म में मिल्खा के जीवन का देसी अंदाज दिल में उतर जाता है। यही एक बात है, जो ऐसी फिल्मों को सफल बनाती है। दरअसल आधुनिकता की मजबूरी से ऊबा आज का दर्शक गावों के सुकून को परदे पर ही सही, देखकर खुश हुए बिना नहीं रहता और फिल्म हिट हो जाती है।