इस फिल्म के सेट पर पनपी मोहब्बत
1930 में बंटवारे से पूर्व पंजाब में पाकिस्तान के सरगोधा शहर में जन्मीं गीता बाली 'बदनामी', 'बावरे नैन' 'आनंद मठ' और 'जब से तुम्हें देखा है' जैसी फिल्मों में नजर आईं। निजी जिंदगी की बात करें तो गीता बाली की मुलाकात केदार शर्मा की फिल्म 'रंगीन रातें' के सेट पर शम्मी कपूर से हुई। गीता बाली उन दिनों हिंदी सिनेमा में अपने पैर जमा चुकी थीं, जबकि कपूर खानदान से ताल्लुक रखने के बावजूद शम्मी कपूर संघर्ष के दौर से गुजर रहे थे। गीता बाली की सिफारिश पर ही शम्मी कपूर को यह फिल्म मिली थी। यहीं से दोनों की मोहब्बत पनपी।
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प्यार में मिट गया उम्र का बंधन
कहा जाता है कि आउटडोर शूटिंग पर रानीखेत गयी 'रंगीन रातें' की टीम और निर्देशक केदार शर्मा की तीखी नजरों के बीच शुरू हुआ मुलाकातों का सिलसिला टीम की मुंबई वापसी तक पूरा परवान चढ़ चुका था। मुंबई पहुंचने पर दोनों शादी का फैसला कर चुके थे। लेकिन, यह राह इतनी आसान नहीं थी। शम्मी कपूर उम्र में गीता बाली से छोटे थे। मगर, प्यार में उम्र का बंधन मिट चुका था। शम्मी कपूर भले ही गीता बाली के साथ जीने-मरने की कसम खा चुके थे, लेकिन उन्हें भी यह पता था कि परिवार से रजामंदी मिलना आसान नहीं है।
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जॉनी वॉकर ने दिया सुझाव
शम्मी कपूर एक तो गीता बाली से उम्र में छोटे थे, दूसरा उस वक्त तक उनका करियर भी खास परवान न चढ़ा था। इसके अलावा गीता 'बावरे नैन' में शम्मी के बड़े भाई राजकपूर और 'आनंदमठ' में पिता पृथ्वीराज कपूर की हिरोइन भी रह चुकी थीं। शम्मी कपूर एक अजीब उलझन में थे, तब शम्मी कपूर के जिगरी यार जॉनी वॉकर ने उन्हें सलाह दी कि वह भागकर गीता बाली से शादी रचा लें। शम्मी कपूर को जॉनी वॉक की बात कुछ जम गई। गीता बाली को हालांकि जॉनी वॉकर का यह सुझाव खास पसंद नहीं आया था, लेकिन शम्मी कपूर की जिद के आगे उनकी नहीं चल सकी। बहरहाल, वो तैयार हो गईं।
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आधी रात को पहुंचे मंदिर, लिपस्टिक से मांग भर रचाई शादी
23 अगस्त 1955 की आधी रात को शम्मी कपूर, जॉनी वॉकर, और हरिवालिया के साथ मुंबई स्थित वानगंगा मंदिर में गीता के साथ विवाह बंधन में बंधने के लिए पहुंच गए। शम्मी कपूर जब मंदिर पहुंचे तो मंदिर के दरवाजे बंद हो चुके थे। इसलिए पुजारी ने उनकी शादी कराने से इंकार कर दिया। शम्मी की जिद और हालात को देखते हुए पुजारी ने उन्हें सुबह आने की सलाह दी और भरोसा दिलाया की मंदिर के कपाट खुलते ही शादी कराई जाएगी। सुबह चार बजे शम्मी मंदिर के सामने हाजिर थे। सभी रस्मों-रिवाज पूरे होने के बाद जब पुजारी ने उन्हें दुल्हन की मांग में सिंदूर भरने को कहा तब उन्हें ध्यान आया कि जल्दबाजी में वह सिंदूर लाना भूल ही गए। तब गीता बाली ने अपनी लिपस्टिक शम्मी के हाथों में थमा दी। इस तरह सिंदूर की जगह लिपस्टिक लगाकर शम्मी कपूर ने गीता को अपना बना लिया। गीता और शम्मी का साथ ज्यादा दिनों तक नहीं रह सका। 1965 में चेचक की बीमारी के चलते गीता बाली का निधन हो गया। दोनों के दो बच्चे- आदित्य राज कपूर और कंचन हैं।
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