इज्जत के साथ करते हैं काम
दरअसल, हाल ही में दिए इंटरव्यू में गजराज ने बताया कि वह हमेशा सोच समझ कर फैसला लेते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे अपनी प्रतिभा या अभिनय पर शक नहीं था। लगातार मेरा संघर्ष जारी था और वह संघर्ष सम्मान पाने के लिए था। अगर, मुझे कहीं भी अपमान महसूस होता है या लगता है कि लोग मेरे साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं तो मैं उन लोगों के साथ काम नहीं करता, जो लोग बहुत सफल नहीं होते हैं। उन्हें अक्सर इसका सामना करना पड़ता है क्योंकि उनके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता है।
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साधारण जिंदगी जीने की इच्छा
गजराज ने कहा कि मैं अपने स्वाभिमान को किनारे रखकर या सिर नीचे रख कर काम नहीं कर सकता। मैं हर समय इसका पालन करूंगा। मैं अपने खर्च को सीमित रखूंगा। आप तब फंस जाते हैं, जब आपकी इच्छाएं बहुत ज्यादा होती हैं और आपके पास उन इच्छाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन या कमाई नहीं होती। इसके बाद आप कर्ज लेते हैं। फिर, आप कर्ज चुकाने के लिए काम करना शुरू करते हैं। अगर, कोई आपके साथ गलत व्यवहार कर रहा है या कोई भूमिका खराब है तो इसे वैसे भी आपको करना पड़ेगा, यह सोच कर कि कम से कम पैसा तो आएगा, लेकिन मैं ऐसा नहीं चाहता।
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नहीं पसंद उधार की जिंदगी
गजराज ने अपने संघर्ष के दिनों के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि 1994 में आई फिल्म 'बैंडिट क्वीन' से लेकर साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म 'बधाई हो' तक का सफर दो दशकों से अधिक लंबा था, लेकिन इस दौरान उन्होंने अपने और अपने परिवार के खर्चों में भारी कटौती की। गजराज ने कहा कि इन 10-20 साल में मैंने मेरी पत्नी और अपनी जरूरतों पर लगाम लगाया था। मेरी पत्नी ने मेरा बड़ा सहयोग किया और हमने शुरू से ही कोशिश की कि हम किसी से कर्ज न लें और उधार की जिंदगी न जिएं।
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