हिंदी भाषा की महत्ता देश के मनोरंजन जगत में इतनी ज्यादा है कि दूसरी भाषाओं की फिल्में हिंदी में डब होकर कमाई के रिकॉर्ड बना चुकी है। देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्में बाहुबली और एवेंजर्स एंडगेम हैं और इन दोनों ने भारतीय भाषाओं में मोटी कमाई जिस एक भाषा के चलते की है, वह है हिंदी। लेकिन, हिंदी फिल्मों के शीर्षक हिंदी में लिखे जाने की मोदी सरकार की सलाह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दी है।
सिनेमा में देवनागरी की महत्ता
पिछली मोदी सरकार ने 2018 के हिंदी दिवस से महीना भर पहले यह मंशा जाहिर की थी कि हिंदी फिल्मों के शीर्षक और उनके कलाकारों व तकनीशयिनों के नाम (क्रेडिट रोल) हिंदी में जरूर लिखे जाने चाहिए। निर्माता अगर किसी दूसरे भाषा में भी इन्हें लिखना चाहे तो उस पर कोई रोक नहीं है लेकिन अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्मों की तरह ही हिंदी भाषा की फिल्म में भी नाम लिखते समय देवनागरी लिपि का प्रयोग होना चाहिए। सरकार ने इस बारे में एक आधिकारिक सलाह पत्र भी जारी किया लेकिन एक दो फिल्म निर्माताओं को छोड़ किसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार के दौरान इस पर कोई अमल नहीं किया।
Dabangg 3
- फोटो : social media
सलमान की दबंग 3 का पोस्टर अंग्रेजी में
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को हिंदी फिल्मों के शीर्षक और कलाकारों व तकनीशियनों के नाम हिंदी में लिखे जाने की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन, हिंदी के मशहूर लेखक प्रसून जोशी के बोर्ड के अध्यक्ष बन जाने के बाद भी हालात नहीं सुधरे।
हाल ही में सलमान खान की फिल्म दबंग 3 के तमिल, तेलुगू और कन्नड़ में जारी पोस्टर पर तो फिल्म का नाम इन्हीं भाषाओं में लिखा है लेकिन हिंदी संस्करण का पोस्टर सलमान खान ने अंग्रेजी में ही जारी किया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल भी किया गया, पर हिंदी में फिल्म का पोस्टर अब तक जारी नहीं किया। उल्टे इस हफ्ते रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म पहलवान जब हिंदी में जब होकर रिलीज हुई तो उसका पोस्टर हिंदी में ही जारी हुआ।
सेंसर बोर्ड ही पास करता है पोस्टर
गौरतलब है कि फिल्मों को सेंसर करने के अलावा सेंसर बोर्ड फिल्मों के पोस्टर और प्रचार सामग्री की भी अनुमति देता है। बिना इसके कोई फिल्म निर्माता अपनी फिल्म के पोस्टर जारी नहीं कर सकता। मोदी सरकार एक ने जहां फिल्मों को लेकर एडवाइजरी की थी वहीं मोदी 2.0 सरकार ने ऐसा ही एक इच्छा टेलीविजन कार्यक्रम निर्माताओं को इस साल जून में भेजी।
सरकार की पहल है कि हिंदी में बनने वाले सारे टेलीविजन कार्यक्रमों के शीर्षक, कलाकारों और तकनीशियनों के नाम सैटेलाइट चैनल हिंदी में ही प्रसारित करें। अन्य भारतीय भाषाओं में बने कार्यक्रमों में ये नाम संबंधित भाषाओं में ही लिखे जाते हैं, पर हिंदी के निर्माता ऐसा नहीं कर रहे। सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की ये पहली भी सिनेमा में की गई पहल की तरह अनसुनी ही रह गई।