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कागज और तपस्या जैसी फिल्मों के निर्माता अनिल का निधन

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कोरा कागज और तपस्या जैसी शानदार फिल्म हिन्दी सिनेमा को देने वाले फिल्म निर्माता अनिल गांगुली का देहांत हो गया है। वह 82 साल के थे। अनिल पिछले कुछ समय से बीमार थे। हालांकि उनको कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। लेकिन कुछ समय से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था। सिनेमा के क्षेत्र में अनिल का योगदान शानदार है।
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अनिल को खासतौर से जया भादुडी की मुख्य भूमिकाओं वाली कोरा कागज और तपस्या जैसी फिल्म बनाने के लिए जाना जाता है। दोनों फिल्मों ने नेशनल अवॉर्ड जीता। निर्देशक और स्क्रीन राइटर के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले अनिल लगभग चार दशकों तक फिल्मों से जुड़े रहे।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उन्होंने घर पर ही आखिरी सांसे ली। अनिल ने 1962 में फिल्म टिकट में असिस्टेंट निर्देशक के तौर पर करियर शुरू किया। उन्होंने अपने करियर में सभी तरह की फिल्मों की। करियर के आखिरी दिनों में उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती के साथ काफी एक्शन फिल्में भी कीं।
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ये हैं अनिल गांगुली की खास फिल्में

अनिल गांगुली ने हिन्दी के साथ-साथ बंगाली फिल्मों का भी निर्देशन किया। उनकी मुख्य फिल्मों में 'मेरा यार मेरा दुश्मन' 'कोरा कागज' अनिल कपूर और अमृता सिंह की 'साहेब', 'तृष्णा' 'खानदान' 'आंचल' 'दुश्मन देवता' और 'अंगारा' जैसी फिल्में बनाईं।

बंगाली सिनेमा के लिए उन्होंने 'किया पारा किए निजारा', 'बलिदान' जैसी फिल्में बनाईं। 1962 से 1998 तक वो सक्रिय रहे। उनकी बेटी रुपाली गांगुली थियेटर की बड़ी स्टार हैं। वो फिल्मों भी काम कर चुकी हैं। उनके बेटे विजय गांगुली निर्देशक और सिनेमेटोग्राफर हैं।
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