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Film Review : पढ़ो और आगे बढ़ो का संदेश देती है फिल्म 'अलिफ'

Fri, 03 Feb 2017 11:59 AM IST
रवि बूले / अमर उजाला, मुंबई ब्यूरो
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अलिफ
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निर्माता- पवन तिवारी-जैगम इमाम
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निर्देशक- जैगम इमाम
स्टारकास्ट- नीलिमा अजीम, दानिश हुसैन, भावना पाणी, सिमाला प्रसाद, आदित्य ओम, मोहम्मद सऊद, ईशान कौरव
रेटिंग- ***1/2


शिक्षा पाना हर बच्चे का हक है मगर शिक्षा के संसार में असमानता का संकट है। यह विचार का बेहद विस्तृत विषय है मगर लेखक-निर्देशक जैगम इमाम फिल्म 'अलिफ' में इसे मुस्लिम समाज के संदर्भ में उठाते हुए कुछ जरूरी मुद्दों से रूबरू कराते हैं। 'अलिफ' उर्दू वर्णमाला का पहला अक्षर है। जैगम मुस्लिम समाज से नई शुरुआत का आह्वान करते हैं। वह बच्चों को मदरसों में दी जाने वाली दीन की शिक्षा के बरक्स आधुनिक स्कूलों की दुनियावी शिक्षा को रखते हैं। तरक्की की राह पर बढ़ती दुनिया में आज ज्यादा जरूरी कौन सी शिक्षा है?

लड़ना नहीं, पढ़ना जरूरी

मोहम्मद सऊद
फिल्म का मूल संदेश है-लड़ना नहीं, पढ़ना जरूरी है। इस बात से असहमत होने की कोई वजह नहीं क्योंकि तालीम ही इंसानी किरदार को गढ़ती है। तरक्की के दरवाजे खोलती है। 'अलिफ' इस समय की महत्वपूर्ण फिल्म है जिसकी कहानी अलग-अलग सतहों पर चलती है। यहां शिक्षा के सवाल हैं। प्यार की परीक्षा है। ऐसा परिवार है जिसका मुखिया मुस्लिम पहचान के साथ सहमा हुआ सा जी रहा है। यहां हिंदू-मुस्लिम विमर्श भी है।

मदरसे में पढ़ रहे अली (मोहम्मद सऊद) की जिंदगी तब बदल जाती है जब पाकिस्तान से आई फूफी (नीलिमा अजीम) भाई (दानिश हुसैन) से कह कर उसे अंग्रेजी स्कूल में दाखिला दिलाती है। वह चाहती है कि अली पिता की तरह हकीम के बजाय पढ़-लिख कर डॉक्टर बने। 12 साल के अली को अंग्रेजी स्कूल की तीसरी क्लास में प्रवेश मिलता है मगर वहां के अनुशासन और भाषा से वह बेखबर है। उस पर मदरसेवाला जानकर अध्यापक भी उसके प्रति क्रूर हो जाते हैं। वह कैसे बढ़ सकता है? 
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शिक्षा ही वह कुंजी है जिससे मुश्किलों के ताले खोले जा सकते हैं

अलिफ
इधर,अली के मदरसा छोड़ अंग्रेजी स्कूल जाने से मौलवी और हाफिज पूरे परिवार से नाराज हैं। उधर अली का परिवार नहीं चाहता कि फूफी पाकिस्तान लौटें क्योंकि वहां उनका कोई नहीं है। सारी घटनाएं गुंथी हुई हैं। कई बातें उभरती हैं जो देश और समाज के मुस्लिम परिवारों में आए दिन चर्चा का मुद्दा होती हैं। आप 'अलिफ' को देश के एक आम मुस्लिम परिवार की सच्ची तस्वीर की तरह देख सकते हैं।

सभी अभिनेताओं ने अपने किरदारों को खूबसूरती से निभाया है लेकिन सबसे ज्यादा प्रभाव दोनों बच्चे, सऊद मोहम्मद और ईशान कौरव छोड़ते हैं। जैगम ने साहस के साथ यह विषय चुना और बुना है। वह पूरी विनम्रता से कट्टरपंथी विचारधारा के सामने तरक्की की राह चुनने की अपील करते हैं। 'अलिफ' के सामाजिक सरोकार का दायरा बहुत बड़ा है। शिक्षा ही वह कुंजी है जिससे मुश्किलों के ताले खोले जा सकते हैं। इस बात को समझ लेने मात्र से बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
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