मंगलवार को हुई फिल्म सिटी की लखनऊ बैठक के बारे में मुंबई में फिल्म उद्योग से जुड़े लोग अच्छी बातें कर रहे हैं, लेकिन बैठक में बुलाए गए लोगों की लिस्ट फाइनल करने वाले अफसरों पर सवाल भी उठा रहे हैं। फिल्म निर्माताओं की देश की सबसे बड़ी संस्था इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (इम्पा) के अध्यक्ष और वरिष्ठ फिल्म निर्माता टी पी अग्रवाल कहते हैं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई फिल्म सिटी बनाने का जो निर्णय लिया है, उसके लिए वह साधुवाद के पात्र हैं, लेकिन इस बारे में हुई या आगे होने वाली बैठकों में फिल्म निर्माताओं को तो बुलाना चाहिए। मंगलवार की बैठक में तो फिल्म निर्माताओं की किसी संस्था का कोई प्रतिनिधि नहीं बुलाया गया। फिल्म तो निर्माता बनाएंगे, न कि लेखक, गायक, गीतकार या निर्देशक।
मंगलवार को लखनऊ में नई फिल्म सिटी को लेकर हुई बैठक के बारे में हिंदी फिल्म जगत और दक्षिण भारत के बड़े फिल्म निर्माता भी अनौपचारिक बातचीत में इस बात पर हैरानी जता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के कुछ अफसरों ने कैसे वहां के मुख्यमंत्री को वस्तुस्थिति की सही जानकारी ही नहीं दी है। जिन फिल्म निर्माताओं से इस फिल्मसिटी में जगह खरीदने की उम्मीद की जा रही है, उन्हें बैठक में बुलाया नहीं गया और जो बैठक में मौजूद थे, उनमें से कोई गायक, गीतकार या निर्देशक खुद कोई नया फिल्म स्टूडियो उत्तर प्रदेश की इस नई फिल्म सिटी में बना सकने को न तो इच्छुक होगा और न ही इनमें से एक दो को छोड़ किसी के पास इतनी आर्थिक शक्ति ही है। हिंदी फिल्मों के तमाम बड़े निर्माताओं की एक और संस्था प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी मंगलवार की बैठक के बारे में किसी आमंत्रण मिलने की सूचना से अनभिज्ञता जताई है।
गिल्ड ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस नए कदम का स्वागत और समर्थन किया क्योंकि इससे फिल्म निर्माताओं के पास अपनी फिल्मों की शूटिंग के लिए नए विकल्प मुहैया होंगे लेकिन, गिल्ड का भी यही कहना है कि ऐसी किसी योजना के क्रियान्वयन में उन लोगों को जरूर शामिल किया जाना चाहिए जो व्यावहारिक रूप से फिल्म निर्माण में लगातार संलग्न हैं ताकि ये प्रस्तावित फिल्म सिटी उनकी जरूरतों का भी ख्याल रख सके।