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समीक्षा सुल्तान: सल्लू की मुक्केबाजी से खुश होंगे फैन्स

Thu, 07 Jul 2016 08:54 AM IST
रवि बुले/ अमर उजाला, मुंबई ब्यूरो
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सुल्तान - फोटो : फोटो- ट्विटर
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निर्माताः आदित्य चोपड़ा
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निर्देशकः अली अब्बास जफर
सितारेः सलमान खान, अनुष्का शर्मा, अमित साध, रणदीप हुड्डा, कुमुद मिश्रा
रेटिंग ***

'बेबी को बेस पसंद है', जिस दावे से सलमान खान 'सुल्तान' में अपनी हीरोइन के बारे में यह बात कहते हैं, उसी दावे से आप कह सकते हैं कि उनके चाहने वालों को यह फिल्म पसंद आएगी। सुल्तान सलमान की तमाम फिल्मों की तरह प्रशंसकों के लिए 'ईद' का तोहफा है। प्रशंसक अपने हीरो की हर अदा के दीवाने होते हैं। इस फिल्म में उन्हें सलमान के सब अंदाज पसंद आएंगें। प्यार करने के भी और अखाड़े में विरोधियों को परास्त करने के भी। 170 मिनट की इस फिल्म को देखने से पहले कुछ सोचने-समझने की जरूरत नहीं है। सुल्तान उन्हें संतुष्ट जरूर करेगी। उनका टाइम अच्छा पास होगा।

लेकिन जो लोग सिनेमा में नएपन की आस लिए जाते हैं, उन्हें पहले सीन में ही झटका लगेगा क्योंकि शुरुआत के साथ ही साल भर पहले आई 'ब्रदर्स' (निर्देशकः करन मल्होत्रा) याद आएगी। वैसे ही रंग और सैट-अप के साथ मिक्स मार्शल आर्ट्स प्रतियोगिता को कामयाब बनाने की कोशिश में चिंतित एक बिजनेस मैन।
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सलमान ने अपने फैन्स पर चलाया कुश्ती का जादू

सलमान और अनुष्का - फोटो : ANI
कुश्ती से शुरू होने वाली सुल्तान की कहानी मिक्स मार्शल आर्ट्स, जिसे यहां प्रो टेक डाउन नाम दिया गया है, पर खत्म होती है। फिल्म ब्रदर्स की तरह ही सुल्तान में भी मिक्स मार्शल आर्ट्स आखिरी लगभग एक घंटे चलता रहता है। इस फाइटिंग में दोहराव के सिवा कुछ भी नहीं है। सुल्तान से कुछ लोगों को यह शिकायत भी हो सकती है कि इसकी समयावधि लंबी है। कुछ सीन छट सकते थे। दो-एक गाने कम हो सकते थे। तब शायद फिल्म की रफ्तार और सटीक होती। सुल्तान अपने पहले हिस्से में अधिक रोचक और बांधने वाली है। इसमें रोमांस और एक्शन मिट्टी से जुड़े हैं। 

हरियाणा के रेवाड़ी का रहने वाला सुल्तान अली खान (सलमान खान) 30 साल का होकर भी लक्ष्यहीन जीवन जी रहा है। उसकी जिंदगी कटी पतंगें लूटने में बीत रही है। पतंग लूटने के लिए दौड़ते हुए वह एक लड़की आरफा (अनुष्का शर्मा) से टकराकर दिल दे बैठता है। फिर एक दिन इसी लड़की को वह कुश्ती के अखाड़े में लड़के को पछाड़ते देखता है। स्टेट लेवल की चैंपियन आरफा उसके प्यार का प्रपोजल तो नहीं स्वीकारती मगर दोस्त जरूर बन जाती है। आरफा का सपना है कि वह ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते क्योंकि यह ख्वाब उसके पहलवान पिता ने देखा है।

आरफा सुल्तान को भी समझाती है कि लड़की होना किसी तरह लड़के से कम नहीं। जब सुल्तान के दोस्त आरफा को भाभी कह कर बुलाते हैं तो वह भड़क जाती है और साफ शब्दों में कहती है कि वह शादी उसी से करेगी जो चैंपियन रेसलर होगा। यहां से सुल्तान की जिंदगी बदलती है और वह कुश्ती के अखाड़े में सफलता की कहानी लिखने लगता है। मगर आगे क्या...?

सलमान के लुक से जुड़ी उम्मीद

सुल्तान - फोटो : self
लेखक-निर्देशक अली अब्बास जफर ने कहानी के शुरुआती दांव-पेंच खूबसूरती से रचे हैं परंतु एक समय के बाद कहानी में अनुमान लगाना बहुत आसान हो जाता है। अतः फिल्म पकड़ खो देती है। इसके बाद आप सिर्फ सलमान के फैन होने की वजह से टिके रहते हैं। दूसरा हिस्सा निराश करता है। यह बेहद कृत्रिम है। इसमें निर्देशक के पास कहने को कुछ रह नहीं जाता और कुश्ती के मैदान से वह मिक्स मार्शल आर्ट्स के रिंग में शिफ्ट हो जाते हैं। देसी मिट्टी से एकदम अनजाने-परदेसी खूनी खेल की तरफ। अक्षय कुमार और सिद्धार्थ मल्होत्रा ने ब्रदर्स में इसी रिंग में मात खाई थी। सलमान अपने फैन्स की वजह से बच जाते हैं। पहले हिस्से में सलमान के किरदार में जहां विविधता है, वहीं दूसरे हिस्से में वह एकरसता में बदल जाती है।

उल्लेखनीय तथ्य यह है कि शेरनी की तरह शुरुआत करने वाली, विचारों में बेहद मॉडर्न आरफा शादी के बाद गर्भवती होते ही पारंपरिक रूप धर लेती है। वह अपना सपना सुल्तान में सच होते देखने की इच्छा पाल लेती है। मॉडर्निटी ढाक के तीन पात में बदल जाती है। कहानी हीरो पर फोकस हो जाती है। समाज जिस द्वंद्व में जी रहा है, लेखक-निर्देशक उसी द्वंद्व में फंस कर मैदान छोड़ देता है।
 
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अनुष्का का भी दमदार परफॉरमेंस

सलमान खान - फोटो : self
सलमान का अभियन अच्छा है। उन्होंने सुल्तान की भूमिका के लिए कितनी कड़ी मेहतन की यह वह पिछले दिनों अपने एक मीडिया इंटरव्यू में बता चुके हैं। आप फिल्म देख कर उनसे सहमत/असहमत हो सकते हैं। वैसे उम्र अब उनके चेहरे पर असर दिखाने लगी है। अनुष्का ने अपना रोल खूबसूरती से निभाया है। अपने किरदार में वह फिट हैं। अनुष्का के पिता/कोच के रूप में कुमुद मिश्रा और आश्वासन देने वाले नेता के रूप में देहरादून के वरिष्ठ पत्रकार सतीश शर्मा ने भी अपनी भूमिकाओं से न्याय किया है।

बिना ब्रेक के विज्ञापन कैसे फिल्म में शामिल किए जा सकते हैं, यह भी आपको सुल्तान में दिखेगा। टीवी कनेक्शन की छतरियों से लेकर कई चीजों का यहां प्रचार है।
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