राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम के प्रबंध निदेशक पद की जिम्मेदारी संभालते हुए भारत के 53 वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह का काम देखने वाले वरिष्ठ अधिकारी रविंदर भाकर की इस पद से छुट्टी कर दी गई है। भाकर ने इस पद का अतिरिक्त कार्यभार ने अभी करीब साल भर पहले ही संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के आयोजन में तमाम खामियां सामने आईं और समारोह की जूरी के अध्यक्ष नादव लापिद के बयान को लेकर भी सरकार की काफी किरकिरी हुई। इस पद का कार्यभार तत्काल प्रभाव से सूचना और प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव (फिल्म) के पद पर कार्यरत पृथुल कुमार को दे दिया गया।
बीते साल 20 से 28 नवंबर को गोवा में हुए भारत के 53 वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के आयोजन में रेवड़ियां बांटे जाने और सारे इंतजामों में कुछ खास लोगों को ही तवज्जो दिए जाने की सबसे पहली एक्सक्लूसिव खबर ‘अमर उजाला डॉट कॉम’ ने 16 नवंबर को प्रकाशित की थी। इस खबर के प्रकाशित होते ही दिल्ली से लेकर मुंबई तक सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी चौकन्ने हुए। खुद रविंदर भाकर ने इस खबर को अप्रकाशित करने के लिए अमर उजाला को फोन किया और लेकिन खबर के लिखित खंडन की बात कहे जाने पर वह शांत हो गए।
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गोवा फिल्म फेस्टिवल के नाम से मशहूर भारत के अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह की व्यवस्था करने के लिए भी जिन एजेंसियों को इस बार लगाया गया, उनके पास इस स्तर के समारोहों की व्यवस्था करने का अनुभव न होने का मुद्दा भी मुंबई से लेकर गोवा तक जोर शोर से उठा। इसके अलावा पैनोरमा के लिए फिल्मों के चयन से लेकर प्रतियोगी खंड के जूरी तक के चयन तक में सिनेमा के जानकार लोगों की राय नहीं ली गई। बताया जाता है कि समारोह में जिन 282 फीचर फिल्मों का प्रदर्शन हुआ, उनमें से तमाम को तो देखने वाले भी गिनती के ही आए।
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