कलाकार: दर्शन रावल (गायक, गीतकार, संगीतकार)। वीडियो निर्देशक: ध्रुवल पटेल। फीचरिंग: करिश्मा शर्मा।
यूट्यूब चैनल: इंडी म्यूजिक लेबल
साईबाबा टेलीफिल्म्स के बनाए सुपरहिट म्यूजिक रिएल्टी शो रॉ स्टार से लोगों की नजरों में आए गायक दर्शन रावल ने पिछले कुछ साल में शोहरत के वे सारे आसमान पा लिए हैं, जहां तक पहुंचने की कोई नया गायक सिर्फ सोच सकता है। लेकिन, गायिकी में शोहरत मिलना आसान है, उसे संभालकर रखने में बड़े बड़े धुरंधर दांव खा जाते हैं, दर्शन के साथ भी ऐसा ही होता दिख रहा है। टी सीरीज जैसी म्यूजिक कंपनी पूरी तरह तैयार हो चुके गानों से उनकी आवाज निकाल दे रही है, वजह बस एक ही है बाजार में उनकी खिसकती साख।
दर्शन रावल ने अपने करियर के सबसे अहम पड़ाव पर खुद को सैक्रेड गेम्स का गणेश गायतोंडे समझ लिया है और तभी तो वह अब खुद ही लिख रहे हैं, खुद ही कंपोज कर रहे हैं। किशोर कुमार बनने की कोशिश अच्छी है लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए इंसान को मस्तमौला होना और संगीत के साजों से ज्यादा अपने आसपास की आवाजों को समझना बहुत जरूरी है।
काश ऐसा होता में दर्शन रावल के अवसान की कहानी है। एक घिसापिटा स्टोरी बोर्ड। नायक ने नायिका से दूरी बनाने की ठानी है। नायक रोते रोते गाता है। और, आखिर में खुद के जानलेवा बीमारी से जूझने की बात दर्शकों को बताकर गाना खत्म कर देता है। सिंगर अपने म्यूजिक वीडियो में खुद मौजूद है और खुद ही लिप सिंक नहीं कर पा रहा है।
वीडियो जैसा ही गाना भी बना है। गाने के बोल सीधे और सपाट हैं। कहीं जीवन का कोई दर्शन नहीं। और, गाते समय कहीं किसी तरह की रियाज के भी दर्शन नहीं होते। दर्शन के लिए ये गाना वेकअप कॉल है और गायिकी में अक्सर असर खिसकने के बाद दूसरे सबेरे के दर्शन कम ही होते हैं।