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सेंसर के दबाव में बदला था ‘शोले’ का क्लाइमेक्स : सिप्पी

Mon, 29 Apr 2013 10:57 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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फिल्म निर्माता रमेश सिप्पी 1975 में आई अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ के अंत से खुश नहीं थे।
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सिप्पी के मुताबिक, सेंसर बोर्ड को फिल्म के वास्तविक क्लाइमेक्स में हिंसा दिखाए जाने पर ऐतराज था, जिसके चलते उन्हें फिल्म के क्लाइमेक्स को दोबारा शूट करना पड़ा था।

फिल्मों में ऑनस्क्रीन हिंसा और गाली सूचक शब्दों के इस्तेमाल को लेकर एक बहस के दौरान सिप्पी ने कहा कि मैं इस बात से सहमत हूं कि, 'फिल्म निर्माताओं को फिल्मों में हिंसा के सीन दिखाते वक्त सामाजिक जिम्मेदारी का ध्यान रखाना चाहिए लेकिन उसके लिए अपनी मूल रचना में फेरबदल करने से तकलीफ होती है।'
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उन्होंने कहा कि, 'वह 'शोले' के क्लाइमेक्स (अंत) को दोबारा शूट करने से खुश नहीं थे।

66 वर्षीय सिप्पी ने कहा कि, 'हममें से ज्यादातर लोग यह बात नहीं जानते होंगे कि शोले के क्लाइमेक्स को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के सुझाव पर बदल दिया गया था, क्योंकि बोर्ड को वास्तविक फिल्म में दिखाई गई हिंसा पर ऐतराज था।
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उन्होंने कहा कि, 'मुझे बोर्ड के अनुसार फिल्म के क्लाइमेक्स को दोबारा से शूट करना पड़ा, लेकिन बतौर फिल्म निर्माता मैं
फिल्म के अंत से सहमत नहीं था।'

सिप्पी ने कहा कि, 'फिल्म के अंत में गब्बर सिंह (अमजद खान) को ठाकुर (संजीव कुमार) द्वारा पिटाई के बाद पुलिस को सौंपते दिखाया गया है, जबकि मैं ऐसा नहीं चाहता था।'

उन्होंने कहा कि इस तरह के क्लाइमेक्स में कुछ भी नया नहीं था क्योंकि ऐसा अक्सर फिल्मों में दिखाया जाता है।
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