हिंदी सिनेमा में खलनायकी और चरित्र अभिनय को नई ऊंचाई देने वाले अभिनेता प्राण शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए।
उनके अंतिम संस्कार में बॉलीवुड की पुरानी पीढ़ी के कलाकार बड़ी संख्या में शामिल हुए, लेकिन नई पीढ़ी के एक्टरों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने की जहमत तक नहीं उठाई।
मौके-बेमौके सार्वजनिक मंचों पर प्राण को अभिनय की पाठशाला करार देने वाली युवा पीढ़ी का उनके अंतिम संस्कार से नदारद रहना आश्चर्यजनक है।
अभिनेता रजा मुराद ने नई पीढ़ी के एक्टरों की अंतिम संस्कार में अनुपस्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि कोई पार्टी होती, तो ये सितारे जरूर आते।
रजा मुराद का यह बयान वाकई बॉलीवुड की संवेदनहीनता को एक बार फिर नए सिरे से सामने रखता है।
प्राण जैसे शिखर अभिनेता के निधन के बाद शाहरुख खान, प्रीति जिंटा और उनके बाद की पीढ़ी के कई एक्टरों ने ट्विटर पर तो अपनी संवेदना जताई, परंतु इस बुजुर्ग अभिनेता के अंतिम संस्कार में शामिल होना उचित नहीं समझा।
नई पीढ़ी के नाम पर सिर्फ निर्माता और निर्देशक करण जौहर उपस्थित हुए। ऐसा नहीं है कि सारे युवा अभिनेता या अभिनेत्री आउटडोर शूटिंग में व्यस्त हैं, दरअसल किसी ने भी प्राण साहब के अंतिम संस्कार में उपस्थित होने की जहमत नहीं उठाई।
क्या मार सकेगी मौत उसे औरों के लिए जो जीता है!
अगर प्राण साहब के बेटे या बेटी नामी प्रोड्यूसर या डायरेक्टर होते, तो शायद ऐसा नहीं होता। तब इन युवा एक्टरों की संवेदना देखते ही बनती।
सच यह है कि पुरानी पीढ़ी के अभिनेताओं के प्रति आज के ज्यादातर एक्टरों के मन में सिर्फ नकली सम्मान है, जो कभी कभी सार्वजनिक स्थलों पर उमड़ता दिख जाता है।
यह पहला मौका नहीं है कि जब युवा पीढ़ी ने पुराने दौर के अभिनेताओं के प्रति इतनी बेरुखी दिखाई हो। पिछले साल ए.के.हंगल और दारा सिंह जैसी महान हस्तियों के अंतिम संस्कार के वक्त भी कुछ ऐसा ही नजारा सामने आया था।
फिल्मों के 10 डायलॉग, जिनमें प्राण ने डाली जान
आज के ज्यादातर एक्टर अपने स्टारडम से चुंधियाए नजर आते हैं। सार्वजनिक मंचों पर ये अपने सीनियर्स के प्रति भले ही सम्मानजनक व्यवहार करते हों, लेकिन इनकी कथनी और करनी में काफी फर्क दिखता है।
हालांकि यहां बात सिर्फ नई पीढ़ी के एक्टरों की ही नहीं है, समूचे बॉलीवुड की मानसिकता की भी है। प्राण जैसे अद्वितीय अभिनेता के अंतिम संस्कार के वक्त हजारों एक्टरों वाले बॉलीवुड की मात्र दर्जनभर हस्तियों की उपस्थिति भी इंडस्ट्री की संवेदनहीनता की कहानी नए सिरे से बयां करती है।
खलनायकों ने दी श्रद्धाजंलि
बड़े परदे पर कोई भी ऐसा खलनायक नहीं, जो प्राण की बराबरी कर सके। हां, उनके पदचिह्नों पर चल कर कई अभिनेताओं ने बॉलीवुड में अपनी विशेष उपस्थिति दर्ज करवाई है।
डैनी, रजा मुराद, टीनू आनंद, शक्ति कपूर और किरन कुमार, प्राण की खलनायकी से प्रेरणा लेकर ही आगे बढ़े। इन सबको प्राण का आशीर्वाद और प्यार दोनों मिला।
यह महज इत्तेफाक नहीं है कि प्राण के अंतिम संस्कार के दौरान बॉलीवुड के खलनायकों की विशेष उपस्थिति थी।
चरित्र अभिनेता की पहचान बनाने से पहले अनुपम खेर और कुलभूषण खरबंदा ने भी बतौर खलनायक बड़ी पहचान बनाई थी।
खलनायकी में अपनी पहचान बना चुके कादर खान भले ही स्वास्थ्य कारणों से अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सके, लेकिन मीडिया में आकर उन्होंने सहयोगी कलाकार को श्रद्धाजंलि दी।
मनोज कुमार सदमे में
प्राण के नजदीकी दोस्त और उन्हें खलनायक की छवि से अलग अपनी फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं देने वाले मनोज कुमार शोक में डूब गए हैं। प्राण के निधन से उन्हें गहरा सदमा पहुंचा है।
मनोज खुद इन दिनों बीमार चल रहे हैं। उनके नजदीकियों के अनुसार मनोज ने प्राण के अंतिम संस्कार में जाने की इच्छा प्रकट की थी, लेकिन वे पहुंच नहीं सके।
मनोज कुमार ने प्राण को उनके कैरियर की बेहतरीन फिल्में दी थीं, जिनमें उपकार और शहीद शामिल हैं।