एफटीआईआई में अपने एडमिशन को लेकर ओमपुरी ने दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होने बताया कि जब वो एफटीआईआई में दाखिले के लिए गए तो गिरीश कन्नड चैयरमैन थे। ओमपुरी ने बताया कि वो उस समय काफी दुबले-पतले थे। देखन में भी अच्छे लगते नहीं दिखते थे। ऐसे में एफटीआईआई में उनका इंटरव्यू लेने वाली टीम हैरान थी।
अमर उजाला के संवाद के संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। वो अपनी आने वाली फिल्म 'हो गया ना दिमाग का दही' के प्रमोशन के लिए अमर उजाला के दफ्तर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होने बताया कि उनका चेहरा देखकर इंटरव्यू लेने वाली टीम ने कहा कि ये तो ना हीरो दिखता है ना विलेन। भूत-प्रेत के रोल में भी फिट नहीं लगेगा ऐसे में यो फिल्मों में करेगा क्या।
ओमपुरी ने बताया कि उन्ह ऑडिशन में अच्छे नंबर मिले थे। इसीलिए गिरीश कन्नड और टीम ने फैसला ये किया कि इसकी किस्मत है, ये क्या करता है। प्रतिभा है तो दाखिला दीजिए। तो कुछ इस तरह मिला ओमपुरी को एफटीआईआई में एडमिशन।
एक्टिंग सीखने के लिए एफटीआईआई बेहतर
ओमपुरी देश के दो बड़े एक्टिंग संस्थानों का हिस्सा रहे। पहले नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के छात्र रहे और फिर एफटीआईआई के। दोनों में वो किसको बेहतर मानते हैं और नए छात्रों के लिए कौन सा संस्थान बेहतर है? इस सवाल पर ओमपुरी ने खुलकर अपनी बात रखी।
ओमपुरी ने कहा कि एक्टिंग सीखने के लिए तो नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ही बेहतर है। ओमपुरी ने कहा कि वो एफटीआईआई इसलिए गए क्योंकि उस समय एनएसडी को कम लोग जानते थे। उन्होने बताया कि मुंबई में फिल्मों तक पहुंचने के लिए ही उन्होने एफटीआईआई जाने का फैसला किया।
ये फिल्म आपके हंसने के लिए है
ओमपुरी ने अपनी आने वाली फिल्म 'हो गया ना दिमाग का दही' के बारे में बताया कि ये फिल्म सिर्फ इसलिए बनाई गई है, कि आप हंसे। उन्होने कहा कि हंसना बेहद जरूरी है। ये सेहत के लिए जरूरी है। ओमपुरी ने कहा कि इसीलिए हम आपके लिए ये फिल्म लेकर आए हैं, ताकि आप हंस सकें।
ओमपुरी ने कहा कि ये फिल्म कॉमेडी जरूर है। लेकिन इसमें ऐसा कुछ नहीं है, जो बच्चों के साथ ना देखा जा सके। उन्होने कहा कि फिल्म में साफ-सथुरा मनोरंजन है। ओमपुरी और राजपाल की मुख्य भूमिकाओं वाली ये फिल्म 16 अक्टूबर को रिलीज होगी।