टी सीरीज लगातार स्वर्गीय नुसरत फतेह अली खान की कव्वालियों के मुखड़े उठाकर उन पर नए और उभरते गीतकारों से गाने लिखवा रही है। फिल्म सिम्बा का नया गाना तेरे बिन इसी की अगली और कमजोर कड़ी है। यहां सवाल ये भी उठता है कि रोहित शेट्टी जैसे निर्देशक भी कैसे एक म्यूजिक कंपनी के आगे घुटने टेक देते हैं।
बाजीराव सिंघम के गांव में पला बढ़ा संग्राम भालेराव उर्फ सिम्बा मोहब्बत के एहसास जताने के लिए पंजाबी में क्यों गाएगा, क्यों नहीं कोई निर्देशक एक बार भूषण कुमार से बोलता है कि आता माझी सटकली। हिंदी सिनेमा में गीतकारों और संगीतकारों का ये 'भूषण काल' चल रहा है। कोई भी कुछ भी अपने मन से न बना पा रहा है और न लिख पा रहा है।
'तेरे बिन नईं लगता जी मेरा ढोलणा' नुसरत फतेह अली खान की कालजयी कृति रही है। उनके संगीत की विरासत का कानूनी वारिस कौन है, इस पर पाकिस्तान में लड़ाई भी चलती रही है। फतेह अली खान की विरासत को जितनी संजीदगी से नुसरत ने संभाला था। राहत उसी विरासत को चंद पैसों की खातिर पुर्जा-पुर्जा करते जा रहे हैं और उनके इस काम में बराबर के भागीदार बन रहे हैं। तनिष्क बागची जैसे संगीतकार जो ओरीजनल तो कुछ बना नहीं पा रहे जो पहले से अच्छा बना हुआ है, उसे और खराब कर रहे हैं।