इमरान हाशमी हिंदी सिनेमा के बिकाऊ कलाकारों की लिस्ट से कब के बाहर हो चुके हैं। 'द डर्टी पिक्चर' के बाद से इमरान की ऐसी कोई फिल्म नहीं आई जिसे बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट का तमगा मिल सका हो। अब अगले महीने उनकी फिल्म 'चीट इंडिया' रिलीज हो रही है। इमरान बता रहे हैं कि क्या है ये फिल्म और बतौर प्रोड्यूसर अब आगे का उनका सफर कैसा होगा ।
- इमरान, देश की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद गड़बड़ियों को लेकर तमाम फिल्में इन दिनों बन रही हैं। 'चीट इंडिया' के जरिए आप क्या कहना चाह रहे हैं?
'हमारी शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से टूट चुकी है और इससे सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि हम सब प्रभावित हो रहे हैं। जैसे मैं अपने बच्चे की शिक्षा के लिए डरा रहता हूं। हमारी जो शिक्षा व्यवस्था है उसकी कोई दिशा नहीं है। दुनिया को इस शिक्षा से देखा जाए तो कोई फायदा आगे चलकर नहीं मिलता। दलाल शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर रहे हैं। हम इसी बात को हाईलाइट कर रहे हैं 'चीट इंडिया' में। फिल्म में मेरे किरदार यानी कि राकेश का बहुत बड़ा नेटवर्क है। वह ऐसे लोगों को मेरिट लिस्ट में जगह दिलाता है जो काबिल नहीं है। ये फिल्म दिखाती है कि कैसे अच्छे छात्र इस माफिया के चलते हाशिये पर चले जाते हैं। देश की शिक्षा व्यवस्था को एक क्त्रसंति की जरूरत है और ये जितनी जल्दी हो सकेए होनी चाहिए।
-तो ये राकेश कौन है? कहां से आया और इसको अपने कारोबार की खुराक कहां से मिलती है?
राकेश का अड्डा उत्तर प्रदेश के झांसी में है। दो बार मेडिकल में फेल हो चुका है। गायक बनना चाहता था। लेकिन वह कुछ नहीं बन पाया तो उसके भीतर इस पूरी व्यवस्था के खिलाफ जबर्दस्त गुस्सा है। वह व्यवस्था की कमजोरियां जान चुका है। वह पैसे लेकर किसी को भी मेरिट लिस्ट में पहुंचा सकता है। ये शिक्षा व्यवस्था की भीतरी गड़बड़ियां दिखाता हैए मुझे उम्मीद है कि फिल्म को देखकर देश के हुक्मरान असली दिक्कत समझ सकेंगे और इसे सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
-आप फिल्म प्रोड्यूसर बन चुके हैं। बतौर प्रोड्यूसर आप पर अब कितना दबाव रहता है?
जब मैं किसी फिल्म में सिर्फ अभिनय कर रहा होता हूं तो मेरा काम होता है सेट पर जाकर शूटिंग कर देना। लेकिन प्रोड्यूसर बनना अलग है। अब मैं फिल्म की स्क्रिप्टिंग से लेकर रिलीज तक इसमें शामिल रहता हूं। मैं ये तय कर सकता हूं कि फिल्म कैसी बनेगी। मैं फिल्म की एडिटिंग में शामिल रहता हूं। मेरा मकसद है कि मैं फिल्म मेकिंग के हर स्टेप पर इसमें शामिल रहूं तो इसीलिए मैं फिल्म प्रोड्यूसर बना।
-फिल्म चीट इंडिया का विषय जब आपको मिला तो आपकी पहली प्रतिक्त्रिस्या क्या थी?
फिल्म के निर्देशक सौमिक सेन ने जब मुझे ये कहानी सुनाई तो मेरी पहली प्रतिक्रिया यही थी कि आखिर इस विषय पर अब तक कोई हिंदी फिल्म क्यों नहीं बनी । इस फिल्म को मैं एक हीरो की फिल्म के तौर पर नहीं देखता। ये फिल्म पूरी व्यवस्था को एक माफिया की नजर से देखते हैं जो पूरे सिस्टम को अपने हिसाब से चला रहा है। यह अपने आप में इस विषय को देखने का बहुत ही रोचक नजरिया लगा मुझे।