गुलजार शायरी और गाने लिखने में ही मकबूल नहीं थे। उनके लिखे डायलॉग भी खूब चर्चित रहे हैं। पढ़िए ऐसे 10 डायलॉग
*"बाबूमोशाय , ज़िंदगी और मौत ऊपरवाले के हाथ है…उसे न आप बदल सकते हैं न मैं (आनंद)
*"जीने की आरज़ू में मरे जा रहे हैं लोग.… मरने की आरज़ू में जीए जा रहा हूं मैं!" (नमक हराम)
*"अरे कोई एक आदमी लड़ने के लिए गया और जाकर आज़ादी उठा कर ले आया और लाकर हमें दे दी के ये लो….आज़ादी तुम्हारे
लिए लाये हैं बांट लो!" (माचिस)
*"घर छोड़के शादी करने में एक फ़ायदा है.…लड़की बार बार माइके जाने की धमकी नहीं देती." (साथिया)
*"मेरा शौहर बनने की कोशिश मत करो. बीवी हो, बीवी की तरह रहो." (आंधी)
*"वहीँ..वही शहर है, वही गली, वही घर,सब कुछ.… सब कुछ वही तो नहीं है." (इजाजत)
*अब गुलाब का फूल ख़ूबसूरत है तो है. अब वो ख़ूबसूरत क्यों है, अबे छोड़ो ना यार." (अंगूर)
*हमारे देश में नमक खाने को तो मिलता नहीं. छिड़कने को कहां से मिलेगा. क्यों जीजाजी!." (चुपके चुपके)
*"किसी बड़ी ख़ुशी के इंतज़ार में हम ये छोटी छोटी खुशियों के मौके खो देते हैं." (बावर्ची)
*"ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं बाबू मोशाय. जब तक ज़िंदा हूं, मरा नहीं. जब मर गया, तो साला मैं ही नहीं. (आंनद)