आयुष्मान ने एक बार फिर इस नेक कार्य में मदद करने की ठानी है और उनकी ओर ध्यान खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। वह कहते हैं, “ताहिरा और मैं ‘गुलमेहर’ के साथ बहुत गहराई से जुड़े हुए हैं। यह संगठन दिल्ली की इस जरूरतमंद आबादी की मदद के लिए असाधारण कार्य कर रहा है। महामारी के चलते उनमें से ज्यादातर महिलाएं खतरे के साए में हैं, साथ ही साथ आर्थिक तौर पर भी वे बेहद असुरक्षित हैं। उनकी आय भी काफी प्रभावित हुई है।“
आयुष्मान कहते हैं, “राखी भाई-बहन के प्यार और पवित्र बंधन का प्रतीक है। देश के नागरिकों द्वारा इन महिलाओं की बनाई गई राखियां खरीद कर उनके नेक कार्य में मदद करना आत्म-निर्भरता के जश्न का उल्लास मनाता है।”