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आज मैं हीरोइन होती तो शायद सफल ना होती: आशा पारेख

Mon, 10 Apr 2017 12:32 PM IST
सुप्रिया सोगले/ बीबीसी
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आशा पारेख
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भारतीय सिनेमा में साठ के दशक की 'गोल्डन जुबली गर्ल' आशा पारेख की आत्मकथा 'द हिट गर्ल' का विमोचन सलमान खान मुंबई में करेंगे। इस किताब के बहाने आशा पारेख ने बीबीसी से खास बातचीत की जिसमें उन्होंने अपनी जिंदगी के सुनहरे पलों को याद किया।
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वह बताती हैं कि मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखने वाली आशा पारेख को नृत्य का शौक था। कम उम्र में ही वो मंच पर नृत्य का प्रदर्शन किया करती थीं। निर्देशक बिमल रॉय ने उन्हें देखा और बतौर बाल कलाकार फिल्मों में काम करने का प्रस्ताव रखा।
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बतौर बाल कलाकार कुछ फिल्मों में काम करने के बाद आशा पारेख ने फिल्मों को विराम दिया और 16 साल की उम्र में निर्माता निर्देशक विजय भट्ट के आग्रह पर 'गूंज उठी शहनाई' फिल्म का प्रस्ताव स्वीकार किया।
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आशा पारेख ने विजय भट्ट के साथ बतौर बाल कलाकार 'श्री चैतन्य महाप्रभु' फिल्म में काम किया था। पर तीन दिन की शूटिंग के बाद विजय भट्ट ने आशा पारेख से कहा कि वो 'स्टार मटेरियल' नहीं है जिससे उन्हें बड़ी निराशा हुई।

'दिल देके देखो' से बदली किस्मत

लेकिन एक ही हफ्ते में उन्हें शम्मी कपूर के साथ फिल्म 'दिल देके देखो' में बतौर अभिनेत्री काम करने का मौका मिला। आशा पारेख बताती हैं, "दिल देके देखो की आउटडोर शूटिंग में शम्मी जी की पत्नी गीता बाली जी भी आई हुई थीं। वो मुझे कंधे पर बिठा कर घुमाती थीं और शम्मी जी से कहा करती थीं कि हम आशा को गोद ले लेते है।

तबसे मैं उन्हें चाचा-चाची पुकारने लगी। शम्मी जी बहुत ही हँसमुख स्वभाव के थे। उनके साथ काम करना हमेशा खास रहता था।" अपने सफल दौर में आशा पारेख ने सभी बड़े अभिनेताओं के साथ काम किया जिसमें शामिल है देव आनंद, राजेश खन्ना, शशि कपूर, जीतेन्द्र, मनोज कुमार, पर उन्हें अफसोस है कि वो दिलीप कुमार के साथ काम नहीं कर पाई।

उन्हें "जबरदस्त" फिल्म में दिलीप साहब के साथ काम करने का मौका मिला पर चार दिन की शूटिंग के बाद फिल्म ही बंद हो गई। आशा पारेख को इसका आज भी मलाल है। अपने फैन से जुड़े किस्सों का जिक्र करते हुए आशा पारेख ने एक चीनी फैन का मजाकिया किस्सा बताया, "एक चीनी फैन मेरे घर के सामने अपना डेरा जमाकर बैठ गया। वो वहां से हटने का नाम ही नहीं ले रहा था। मैं बहुत घबरा गई थी। मैंने पुलिस को फोन लगाया और उस फैन को जेल में बंद करवाया।''
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जब लिया संन्यास का फैसला

70 के दशक में नई अभिनेत्रियों के आ जाने के बाद आशा पारेख सह कलाकार की भूमिका में नजर आने लगीं जिसका उन्हें कोई दुःख नहीं है पर जब फिल्म के स्टार फिल्मी सेट पर 8-9 घंटे देर से पहुँचने लगे तो आशा पारेख ने तय किया कि वो अभिनय से संन्यास ले लेंगी।

आशा पारेख 60 के दशक की फिल्मों के दौर को सुनहरा दौर मानती हैं और उन्हें दुःख है कि आज के दौर के संगीत और नृत्य में पश्चिमी सभ्यता का बहुत प्रभाव है और भारतीयता कहीं न कहीं खोती जा रही है। उनका ये भी मानना है कि आज के दौर की कई फिल्मों में आत्मा नहीं होती है।

मौजूदा अभिनेत्रियों के काम से आशा पारेख बहुत प्रभावित हैं। वो कहती है, "आज की अभिनेत्रियां बहुत मेहनत करती हैं। मीडिया और सोशल मीडिया के दौर में वो कैसे अपने आप को संभालती होंगी। अगर आज मैं अभिनेत्री होती तो शायद इतनी सफल न हो पाती जितना उस दौर में हुई।"

आशा पारेख को दुःख है कि आज की अभिनेत्रियां साड़ी-सलवार कमीज को भूल गई है और सिर्फ गाउन में नजर आती हैं। एक समय डॉक्टर बनने की चाह रखने वाली आशा पारेख अब मुंबई में एक अस्पताल से जुड़ी हुई हैं। अस्पताल के काम के साथ साथ अब उनकी दिनचर्या में सह अभिनेत्रियां वहीदा रहमान, हेलेन, शम्मी आंटी और सायरा बानो के साथ वक्त बिताना शामिल है।
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