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'अब खान और कपूर की फिल्मों में म्यूजिक दूंगा'

Wed, 27 Nov 2013 07:47 AM IST
हरि मृदुल/अमर उजाला,मुंबई
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संगीतकार आनंद राज आनंद अपनी ताजा उपलब्धि से पूरी तरह संतुष्ट हैं। इसी हफ्ते रिलीज हुई फिल्म सिंह साब द ग्रेट में दिया गया उनका संगीत काफी पसंद किया जा रहा है।
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मासूम, मेजर साहब, कांटे, प्लान, मुसाफिर, हद कर दी आपने, जिस देश में गंगा रहता है, जानशीं, गुनाह, वेलकम और मस्ती जैसी फिल्मों में यादगार संगीत दे चुके आनंद अपनी इस दूसरी पारी में भी धमाल करने की मंशा रखते हैं।

फिल्म सिंह साब द ग्रेट एक एक्शन फिल्म है। ऐसी फिल्मों में म्यूजिक देना एक चेलेंज होता है। इस फिल्म के म्यूजिक ने आपको कितनी चुनौती पेश की?

मैं यह बात नहीं मानता कि एक्शन फिल्म म्यूजिकल नहीं हो सकती। चाहे शोले हो या मेरा गांव मेरा देश, ये डाकुओं वाले कथानक की फिल्में हैं, लेकिन इनका म्यूजिक लाजवाब
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है। ऐसी बीसियों फिल्में मिल जाएंगी, जिनमें भरपूर एक्शन होने के बावजूद म्यूजिक बड़ा मधुर था। हां, यह जरूर है कि ऐसी फिल्में किसी भी संगीतकार के लिए एक बड़ी चुनौती होती हैं। मुझे सिंह साब द ग्रेट ने एक चेलेंज दिया था, जिसे मैंने स्वीकार किया।

जब आप किसी फिल्म का म्यूजिक तैयार करते हैं, तो उसके हीरो की इमेज का कितना खयाल रखना पड़ता है?
पूरा खयाल रखना पड़ता है। हर हीरो की एक बॉडी लैंग्वेज होती है। अगर मुझे सनी के साथ कोई फिल्म करनी है, तो म्यूजिक का अरेंजमेंट अलग होगा। वही फिल्म शाहिद कपूर के साथ करूंगा, तो ताल बदलनी पड़ेगी।

आपके एक गाने पलंग तोड़ पान... को वल्गर करार दिया गया है। क्या आपने सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए ऐसा गाना तैयार किया?

यह गाना कहीं से वल्गर नहीं है। इस गाने के बोल लोक संगीत से लिए गए हैं। इस तरह के शब्दों वाले गीत हमारे फोक का हिस्सा हैं। वैसे भी मैंने तो सिर्फ धुन बनाई है। शब्द का क्षेत्र मेरा नहीं है।

अठारह साल पहले जब आपने बॉलीवुड में बतौर म्यूजिक डायरेक्टर एंट्री की थी, तब संगीत का एक अलग ही माहौल था। आज का संगीत तो शोर ज्यादा लगता है। आपकी क्या राय है?

पहले संगीत कान से ताल्लुक रखता था, अब आंख से इसका संबंध हो चुका है। यह सच है कि आज का ज्यादातर संगीत हफ्ते या दो हफ्ते ही टिकता है, जब कि पुरानी फिल्मों का संगीत एवरग्रीन है। आज कला के हर क्षेत्र में मार्केटिंग हावी हो चुकी है। अब शॉर्ट टर्म वाली बात ही ज्यादा चलती है।

बतौर संगीतकार आपकी इस दूसरी पारी के लिए क्या खास तैयारियां हैं?
मैंने तय किया है कि अब मैं खान, कपूर और कुमार की फिल्मों में म्यूजिक दूंगा। मैंने आज के सुपर स्टार्स के साथ काम नहीं किया है। मेरी प्राथमिकता यही है कि मैं अब ऐसी फिल्में साइन करूं, जिनमें बड़े हीरो हों।

ऐसा कतई नहीं है कि मैंने बड़े एक्टरों के साथ फिल्में नहीं की हैं। मैं अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, अनिल कपूर और गोविंदा जैसे स्टार्स के साथ काम कर चुका हूं। लेकिन ये बीते दिनों की बातें हैं। अब मैं नई पीढ़ी के सुपर स्टार्स के साथ काम करना चाहूंगा। मेरी अभी बड़ी इनिंग बाकी है।

आपके साथ काम कर चुके शंकर, एहसान और लॉय, सलीम और सुलेमान, प्रीतम और विशाल शेखर जैसे संगीतकार आज छाए हुए हैं। ऐसा क्या हो गया कि आप पिछड़ते चले गए?

मैंने जब इंडस्ट्री में कदम रखे थे, तब नदीम श्रवण, आनंद मिलिंद और अनु मलिक का बोलबाला था। लेकिन मैंने अपनी जगह बनाई। मैंने दस वर्षों में अस्सी से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया है।

मैं काम करता चला गया, लेकिन यह नहीं देख पाया कि आखिर किसके लिए काम कर रहा हूं? दरअसल छोटे बैनर्स के साथ काम करने से मेरा काम नजरअंदाज होने लगा। मेरे साथ की- बोर्ड बजाने वालों को बड़ी फिल्में मिलने लगीं और वे चर्चा पा गए।

ऐसा इसलिए तो नहीं हुआ कि संगीतकार के साथ आप गायक भी बन गए। बाद में आपने गीत भी लिखने शुरू कर दिए। फिल्म निर्माता समझ नहीं पाए कि असल में आप क्या करना चाहते हैं?

यह सही है कि मुझे मल्टी टेलेंटेड होने का नुकसान उठाना पड़ा है। गीतकार और गायक तो मैं शुरू से ही था। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अगर मैं गीतकार नहीं होता, तो संगीतकार भी नहीं होता।
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मुझे अपने लिखे गीतों के कारण ही सफलता मिली है। चूंकि अब मुझे हर कोई जानता है, इसलिए सिर्फ संगीत पर ही ध्यान केंद्रित करूंगा।

अन्य किन फिल्मों में संगीत दे रहे हैं?
मेरे हाथ में इस समय छह-सात फिल्में हैं। सुपर नानी, वेलकम बैक और दिल 2 जैसी फिल्मों के म्यूजिक पर काम कर रहा हूं।
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