12 साल बाद एक बार फिर से अक्षय कुमार खिलाड़ी सीरिज की किसी फिल्म में नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को रिलीज होने वाली उनकी फिल्म 'खिलाड़ी 786' दर्शकों को हंसाने के साथ अपने एक्शन दृश्यों से भी प्रभावित करेगी। पेश है 'खिलाड़ी 786' के खिलाड़ी अक्षय कुमार से खास बातचीतः
लंबे ब्रेक के बाद आप खिलाड़ी बन कर वापस आ रहे हैं। इस ब्रेक की कोई खास वजह?
हां, बिल्कुल। मैं भी इसलिए इस फिल्म को लेकर काफी उत्साहित हूं क्योंकि मुझे 'खिलाड़ी' फिल्म से ही पहली बार हिट फिल्म का स्वाद मिला था। 'खिलाड़ी' सीरिज की फिल्मों में एक्शन का पुट जरूर होता है। मैने ब्रेक इसलिए ले लिया था क्योंकि मेरी पत्नी नहीं चाहती थी कि मैं स्टंट करुं।
पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते मैं दूसरी तरह की फिल्मों में मुड़ गया। अब मुझे लगता है कि अब मैं एक बार फिर से स्टंट कर सकता हूं। यही इस फिल्म को करने की पहली वजह रही। दूसरी वजह इस फिल्म की कहानी है।
इस बार खिलाड़ी के साथ 786 जोड़ा गया है। कोई खास मकसद?
786 नंबर कई लोग लकी मानते हैं। आप देखेंगे कई लोगों की कार का नंबर यही होता है। यह नंबर शुभ माना जाता है। कुली फिल्म में अमिताभ बच्चन के बिल्ले पर 786 लिखा हुआ था। इस फिल्म में आप देखेंगे मेरे हाथों की लकीरों पर ही 786 लिखा हुआ है। 786 जोड़ने से यह फिल्म खास हो गई है।
क्या वजहें रही कि आपने इसी स्क्रिप्ट के साथ खिलाड़ी सीरिज की शुरुआत फिर से की?
यह वजह हीमेश रेशमिया बने। वह फिल्म के निर्माता भी हैं। उन्होंने मुझे इस फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाई थी। मैं उनके साथ हैदराबाद जा रहा था। स्क्रिप्ट ने मुझे खूब हंसाया। मुझे लगा कि इस स्क्रिप्ट को परदे पर बहुत अच्छे तरीके से उतारा जा सकता है। पटकथा की वजह से ही मैं फिल्म के साथ जुड़ गया।
फिल्म का लुक बहुत हद तो 'राउड़ी राठौर' से मिलता जुलता सा है, आपको नहीं लगता दोनों फिल्में एक जैसी हो जायेंगी?
नहीं बिल्कुल नहीं। मैं फिल्म में प्रेजेंटशन को महत्व देता हूं। दोनों फिल्में बिल्कुल अलग हैं। हां दोनों फिल्मों के चरित्रों में उनके नायकों का एटीट्यूड एक जैसा है।
इधर सारे कलाकार कॉमेडी कर रहे हैं, कोई खास वजह?
भारत में कॉमेडी फिल्मों का भविष्य अच्छा है। कॉमेडी फिल्मों को सबसे ज्यादा दर्शक मिलते हैं। जब मैं इस इंडस्ट्री में आया था तब कॉमेडी नहीं थी। गिनी चुनी कॉमेडी फिल्में बन पाती थी जिनका स्तर बहुत अच्छा नहीं होता था। फिर फिल्मकारों ने देखा कि यदि कॉमेडी अच्छी हो तो वह वह सबसे सुरक्षित फिल्म बन सकती है।
कॉमेडी में प्रयोग किए गए जो कि दर्शकों को खूब रास आए। अब कॉमेडी करने का ट्रेंड भी बदल रहा है। पहले की फिल्मों में नायक के साथ खड़ा चरित्र कॉमेडी करता था। अब नायक को ही कॉमेडी करनी पड़ती है। इस बदले हुए ट्रेंड ने इंडस्ट्री को कई नायक दिए हैं।
आप एक्शन और कॉमेडी दोनों जॉनर की फिल्मों में नजर आते हैं निजी तौर पर आप किसे ज्यादा इंज्वॉय करते हैं?
एक्शन को आप मेरा पहला प्यार कह सकते हैं। मैं इस इंडस्ट्री में हूं तो एक्शन की वजह से हूं। लेकिन इंडस्ट्री में सिर्फ एक्शन करके ही सरवाइव नहीं किया जा सकता। जब ट्रेंड बदला तो मैने खुद को बदलना शुरू किया। कॉमेडी फिल्में मुझे अच्छी लगनी शुरू हो गईं। आलोचकों ने भी कहा कि कॉमेडी में मेरी टाइमिंग बेहतर होती है। कॉमेडी करना, एक्शन से ज्यादा मुश्किल होता है। आज मुझे दोनों ही तरह की भूमिकाएं पसंद हैं।
फिल्म में आप काफी अलग लुक में नजर आ रहे हैं? आपके महंगे जूतों भी काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं।
सच बता रहा हूं आपको मैंने कोई काम नहीं किया। यह सारा होमवर्क डायरेक्टर साहब की बीवी कोमल ने किया है, मेरा लुक हो या कपड़े या फिर जूते सभी कुछ उन्होंने ही डिजाइन किया है। जो भी चर्चा हुई जूतों की उसका क्रेडिट उन्हीं को जाना चाहिए।
इंडस्ट्री में दो दशक का समय गुजारने के बाद भी क्या आप फिल्मों के रिलीज के वक्त नर्वस होते हैं?
सच कहूं तो थोड़ा बहुत प्रेशर आता है। शुक्रवार से लेकर रविवार तक फिल्म का ट्रेंड देखता हूं। फिल्म चले या न चले यह मैं सोमवार के बाद नहीं सोचता। इसके बाद मेरा पूरा फोकस अपनी नई फिल्म के लिए होता है।